मूंगुस का पुरवा में भूखे पेट मौत के मुंह में समाए नत्थू जैसे हालात के मारे कई लोग हैं। इनका पेट न तो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना भर पा रही है और न ही अंत्योदय या अन्य राशन कार्डों का अनाज। ये आज भी जंगली फलों और पड़ोसियों से मिलने वाले निवाले पर जिंदा हैं। सपा नेता और अफसर गांव-गांव सूखा राहत पैकेट बांटने का ढिंढोरा पीट रहे हैं, पर इन गरीबों के चूल्हे बुझे पड़े हैं। इन्हीं हालात में नत्थू की जान चली गई। पत्नी समेत छह बच्चे अनाथ हो गए। सरकारी मशीनरी का यही रवैया रहा तो गांवों में जाने कितने ‘नत्थू’ बेमौत मर जाएंगे।
बैबेथोक में रह रही विमला प्रजापति वर्ष 2006 में पति रामदास की मौत के बाद विधवा होने के साथ ही आर्थिक तंगहाली में घिर गई। इन्हीं हालात में उसने किसी तरह तीन बेटियों की शादी की। वह भूमिहीन है। अंत्योदय कार्ड तो बना है पर राशन नहीं मिलता। जनवरी से अब तक राशन नहीं मिला। न ही समाजवादी सूखा राहत पैकेट मिला। विमला बताती है कि कोटेदार के यहां राशन लेने जाओ तो डांटकर भगा देता है। साहूकारों से कर्ज लेकर घर चला रही है। लड़के और बहू अलग मजदूरी कर अपना पेट पाल रहे हैं। अक्सर घर में चूल्हा नहीं जलता। सरकारी योजना का कोई लाभ उसे नहीं मिला।
एसडीएम बोले, पता नहीं था, अब पहुंचा देंगे मदद
बुंदेलखंड का सूखा बना बड़ी मुसीबत
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कुछ ऐसा ही हाल बांदा तहसील के पाड़ादेव (रिसौरा) गांव की वृद्धा राजकुमारी की भी है जिनको अंत्योदय राशनकार्ड देकर प्रशासन ने यह तो स्वीकार कर लिया कि वह बेहद गरीब है लेकिन उसे चार महीने से कोटे से अनाज नहीं मिला है। इन दिनों बुंदेलखंड में बांटा जा रहा समाजवादी सूखा राहत राशन भी उसे नहीं मिला। अलबत्ता उसके कार्ड में कई बार कोटेदार ने बिना राशन दिए ही इंट्री कर दी है। पति विकलांग है। इससे कुछ कमा नहीं पाता। उसके पास जमीन भी नहीं है। वह गांव के लोगों से मांग-मांग कर गुजारा कर रही है। अक्सर कई-कई दिन चूल्हा नहीं जल पाता। अक्सर भूखे पेट सोना पड़ता है। अफसरों से कई बार फरियाद लगाई लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
इन अंत्योदय कार्डधारकों को राशन या समाजवादी सूखा राहत पैकेट न मिलने के सवाल पर नरैनी उप जिलाधिकारी महेंद्र सिंह ने बताया कि यह प्रकरण उनकी जानकारी में नहीं है। वह तत्काल राजस्वकर्मियों को भेजकर इन गरीबों का पता लगवा रहे हैं। उन्हें पर्याप्त मदद मुहैया कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन के पास ऐसे जरूरतमंदों के लिए पर्याप्त मात्रा में राशन इत्यादि उपलब्ध है। जहां भी ऐसा कोई मामला उन्हें पता चलेगा, वहां तत्काल राशन पहुंचाया जाएगा। इन गरीबों को अब तक राशन क्यों नहीं मिला? इसकी भी जांच कराई जाएगी।