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कोविड को 20 लाख, स्कूलों को सात करोड़

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बांदा। ये माननीयों की मर्जी ही है कि कोरोना जैसी महामारी की रोकथाम के लिए अपनी विधायक निधि से दरियादिली नहीं दिखाई। अलबत्ता निजी स्कूलों पर खूब मेहरबान हुए। अपने क्षेत्र के बीमार मतदाताओं के इलाज के लिए भी विधायकों ने कंजूसी बरती।
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जनपद के चार में से सिर्फ दो विधायकों ने कोविड रोकथाम के लिए मात्र 10-10 लाख रुपये दिए हैं। पिछले तीन सालों में 22 करोड़ रुपये की विधायक निधि खर्च कर चुके चारों विधायकों ब्रजेश प्रजापति (तिंदवारी), चंद्रपाल कुशवाहा (बबेरू), प्रकाश द्विवेदी (बांदा) और राजकरन कबीर (नरैनी) ने स्कूलों को छह करोड़ 96 लाख 83 हजार रुपये की सौगात दी। कोविड रोकथाम के लिए वर्ष 2019-20 में विधायक चंद्रपाल कुशवाहा ने 10 लाख रुपये और विधायक प्रकाश द्विवेदी ने 9.88 लाख रुपये अपनी-अपनी निधि से दिए हैं। तीन वर्षों में हरेक विधायक ने प्रतिवर्ष साढ़े पांच करोड़ रुपये की निधि खर्च की।
विधायकों द्वारा 3 वर्षों में स्कूलों को दी गई निधि (लाख रुपये में)---
विधायक 2017-18 2018-19 2019-20
ब्रजेश प्रजापति (तिंदवारी) 148 114.50 87.80
चंद्रपाल कुशवाहा (बबेरू) 35 45 60.70
प्रकाश द्विवेदी (बांदा) 12 19.83 17
राजकरन कबीर (नरैनी) 46 66 45
योग 241 245.33 210.50
नोट-( कुल योग- 6 करोड़ 96 लाख 83 हजार)
विधायकों का निधि कार्ड
(वर्ष 2017-18 से 2019-20 तक)
विधायक ब्रजेश प्रजापति (तिंदवारी)
कोविड रोकथाम- शून्य।
स्कूलों को तीन करोड़ 50 लाख 30 हजार।
इलाज को शून्य।
शेष निधि- कई विकास कार्यों के लिए।
विधायक चंद्रपाल कुशवाहा (बबेरू)
कोविड रोकथाम-10 लाख।
स्कूलों को-एक करोड़ 40 लाख।
इलाज को 75 हजार (एक मरीज को)।
शेष निधि- विभिन्न विकास कार्यों को।
इंसेट---
विधायक प्रकाश द्विवेदी (बांदा)
कोविड रोकथाम-9.88 लाख ।
स्कूलों को 48.83 लाख ।
इलाज को 10.75 लाख (7 मरीज)।
शेष निधि- विभिन्न विकास कार्यों को।
इंसेट---
विधायक राजकरन कबीर (नरैनी)
कोविड रोकथाम-शून्य।
स्कू लों को एक करोड़ 57 लाख।
इलाज को शून्य।
शेष निधि- विभिन्न विकास कार्यों को।
नहीं खर्च कर पाए 17.59 लाख
दो माह पूर्व खत्म हुए वित्तीय वर्ष 2019-20 में तीन विधायकों की निधियों में 17 लाख 59 हजार रुपये शेष थे। उनमें सबसे ज्यादा 11.40 लाख विधायक चंद्रपाल कुशवाहा के शेष थे। प्रकाश द्विवेदी के 5.91 लाख और राजकरन कबीर के मात्र 28 हजार रुपये निधि में शेष रहे। ब्रजेश कुमार प्रजापति ने अपनी पूरी निधि 2 करोड़ शत-प्रतिशत खर्च कर ली। पूर्व विधान परिषद सदस्य नसीमुद्दीन सिद्दीकी अपनी निधि से 6 लाख रुपये नहीं खर्च कर पाए। उनकी सदस्यता खत्म हो जाने से निधि की यह राशि शेष रह गई। विधान परिषद सदस्य सुरेश कुमार त्रिपाठी की निधि में 5.76 लाख शेष थे।
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15 लाख से शुरू हुई निधि पहुंची 3 करोड़
विधायक क्षेत्र विकास निधि योजना वर्ष 1999-2000 में शुरू हुई। इसके पीछे सरकार की मंशा थी कि क्षेत्रीय विधायक अपने क्षेत्र के स्थानीय विकास प्रभावी ढंग से कर सकें। निधि की शुरुआत हरेक विधायक को 15 लाख रुपये सालाना से हुई थी। वर्ष 2016-17 में इसे बढ़ाकर एक करोड़ कर दिया गया। पिछले कुछ वर्षों से इसे बढ़ाकर दो करोड़ सालाना कर दिया गया। जल्द ही यह तीन करोड़ किए जाने की तैयारी है। कोरोना काल में निधि बंद रही। इसे बजट नहीं मिला।
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