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कोरोना कर्फ्यू से आबोहवा में सुधार

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बांदा। कोरोना की दूसरी लहर में लागू हुए कोरोना कर्फ्यू से चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों बांदा, हमीरपुर, महोबा और चित्रकूट की आबोहवा में काफी सुधार हुआ है। पिछले वर्ष लॉकडाउन खत्म होने के बाद तेजी से एक्यूआई (एअर क्वालिटी इंडेक्स) में वृद्धि हुई थी। मंडल का एक्यूआई 160 से 180 के इर्दगिर्द पहुंच गया था। अब एक बार फिर कोरोना कर्फ्यू में वायु गुणवत्ता में सुधार के साथ सूचकांक 80 से 100 के आसपास आ गया है।
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हवा के स्तर में सुधार से चित्रकूटधाम मंडल ग्रीन जोन के नजदीक पहुंच गया है। कोरोना महामारी को काबू करने के लिए प्रदेश सरकार को सख्त पाबंदियां लागू करनी पड़ रही हैं। इन्हीं में कोरोना कर्फ्यू भी शामिल है। इससे लोगों को दिक्कतों का सामना जरूर करना पड़ रहा है, लेकिन पर्यावरण के लिए यह प्रतिबंध बेहद मुफीद साबित हुआ। साप्ताहिक कर्फ्यू और फिर लगातार कोरोना कर्फ्यू लागू होने से ट्रैफिक लोड कम हो गया। आम दिनों की तरह वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लग गया। हानिकारक गैसों में गिरावट से पर्यावरण पर अच्छा असर पड़ा है।
इससे वायु गुणवत्ता बेहतर सुधार हुआ है। वायु गुणवत्ता/मौसम संबंधी एक्यूवेदर वेबसाइट के मुताबिक, मंडल में चित्रकूट जनपद की हवा सबसे ज्यादा शुद्ध हुई। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 56 दर्शाया गया है। यह ग्रीन जोन के बेहद करीब है। बांदा और महोबा का गुणवत्ता सूचकांक 80-85 है। हमीरपुर जनपद का एक्यूआई 100 दर्ज है। ये तीनों जिले यलो (पीला) जोन में हैं। कोरोना कर्फ्यू से पूर्व चारों जिले बांदा, हमीरपुर, चित्रकूट और महोबा रेड (लाल) जोन में थे।
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मंडल में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई)---
जनपद कर्फ्यू से पूर्व अब
बांदा 170-180 85
चित्रकूट 150-160 56
हमीरपुर 180-190 100
महोबा 150-160 80
वायु गुणवत्ता सूचकांक का पैमाना---
0-50 : अच्छा (हरा)
51-100 : संतोषजनक (पीला)
101-150 : संवेदनशील/औसत (नारंगी)
151-200 : अस्वस्थ (लाल)
201-300 : खराब (बैगनी)
301-400 : बहुत खराब (गहरा लाल)
401-450 : गंभीर (गहरा लाल)
451-500 : खतरनाक (गहरा लाल)
एक्यूआई 50 अच्छा, 100 संतोषजनक
वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) को आठ श्रेणी में बांटा गया है। एक्यूआई मूल्य जितना अधिक होगा, वायु प्रदूषण का स्तर उतना ज्यादा होगा। पचास या इससे कम एक्यूआई मानक पर्यावरण लिहाज से बहुत अच्छा माना जाता है। 100 या इससे कम स्तर होने पर संतोषजनक माना जाता है। इसके ऊपर एक्यूआई पहुंचने पर वायु की गुणवत्ता अस्वस्थ मानी जाती है। 300 से अधिक एक्यूआई मान खतरनाक श्रेणी में आता है।
प्रदूषित हवा से सांस रोगियों को दिक्कत
राजकीय मेडिकल कालेज के फिजीशियन डा. करन राजपूत ने बताया कि पर्यावरण प्रदूषित होने से तमाम रोग पनपते हैं। हवा प्रदूषित होने पर सांस रोगियों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। ऐसे में रोगियों, बच्चों और बुजुर्गों को सावधानी बरतना चाहिए। खासकर अस्थमा रोगियों को ज्यादा सावधानी की जरूरत होती है। वायु शुद्ध होने से श्वसन में अच्छा प्रभाव पड़ता है।
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