नागपंचमी पर सांप का प्रदर्शन करता सपेरा।
बांदा। नाग पंचमी पर सड़कों और गलियों में सपेरों की बीन गूंजती रही। श्रद्धालुओं ने देवालयों में विशेष पूजा-अर्चना हुई। घर के द्वार पर महिलाओं ने गाय के गोबर से सांप की आकृति बनाई। देव स्थानों और सांप की बांबियों पर दूध रखा। घरों में कजिलिया बोई गईं।
प्राचीन काल से नाग देवता को खुश करने के लिए नाग पंचमी पर दूध पिलाने की परंपरा है। महेश्वरी देवी, बांबेश्वर, काली देवी, संकट मोचन समेत मंदिरों में श्रद्धालुओं ने हवन-पूजन किया। शहर, कस्बों व गांवों में मंदिरों और नाग की बांबियों में पत्तों के दोनों पर दूध रखा। किशोरियों व महिलाओं के जत्थे सावन गीत गाते गांव के बाहर से मिट्टी लाए और कजेलियां बोई।
बबेरू के मढ़ीदाई व अद्भुत शिव मंदिर में सुबह से श्रद्धालुओें की भीड़ रही। बेल पत्र, धतूरा पुष्प के साथ जलाभिषेक किया और प्रसाद चढ़ाया। शाम को महिलाओं ने समूह में इकट्ठे होकर कजली गीत गाया। दिन में झूले पड़े। तमाम श्रद्धालुओं ने घरों में मिट्टी के शिवलिंग बनवाकर रुद्राभिषेक किया। अतर्रा के गौराबाबा धाम में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की।