बांदा। जिले में खरीफ का डीएपी और यूरिया खाद का सामान्य स्टाॅक खत्म हो गया है। सहकारी समितियों की मांग पर अब पीसीएफ रबी के लिए एडवांस रखी प्री-पोजीसनिंग की खाद भेज रहा है।
धान की रोपाई अंतिम चरण में है, लेकिन किसानों को खाद नहीं मिल रही है। जिले में खरीफ सीजन के लिए एक अप्रैल से अगस्त तक का दानेदार डीएपी का सामान्य लक्ष्य 3,937 मीट्रिक टन था। विभाग का कहना है कि जिले को 3,362 मीट्रिक टन डीएपी मिली। इसमें 3,317 मीट्रिक टन पहले ही सहकारी समितियों को भेजी जा चुकी है। इमरजेंसी के लिए रखी 45 मीट्रिक टन डीएपी मंगलवार को बिसंडा व अतर्रा भेज दी गई है।
इसके अलावा जिन सहकारी समितियों में डीएपी की मांग की गई, वहां रबी के लिए एडवांस रखी प्री-पोजिसनिंग की 190 मीट्रिक टन पीसीएफ से लेकर भेजी जा रही है। इसी प्रकार जिले में खरीफ के लिए पहली अप्रैल से अगस्त तक का दानेदार यूरिया का लक्ष्य 3,232 मीट्रिक टन था। इसमें से 2,947 मीट्रिक टन यूरिया मिली। इसमें 2,748 मीट्रिक टन यूरिया पहले ही समितियों को भेजी जा चुकी है। यूरिया की मांग बढ़ने से विभाग सामान्य लक्ष्य की शेष बची 199 व प्री-पोजीसनिंग की 785 मीट्रिक टन यूरिया सहकारी समितियों में भेज रहा है।
ऐसे में रबी सीजन में डीएपी व यूरिया का संकट हो सकता है। बताते है कि शासन ने जिले को डीएपी व यूरिया देने से इन्कार कर दिया है। मंडल को महज 2600 मीट्रिक टन एनपीएस की एक रैक भेजी जा रही है। इसमें जनपद को 800 मीट्रिक टन एनपीएस मिलेगी।
शासन के आदेश हैं कि जरूरत पड़ने पर प्री-पोजिसनिंग से 30 फीसदी डीएपी व यूरिया ली जा सकती है। जिले में खाद का संकट नहीं है। किसान रबी के लिए अभी से खाद खरीद रहा है। -राजेश कुमार, सहायक आयुक्त/ निबंधक।