करतल। सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और एनजीटी की सख्त रोक के बाद भी केन नदी में बालू का अवैध खनन थम नहीं रहा। नदी की जल धारा को अवरुद्ध कर जेसीबी के जरिये पानी से मौरंग निकाली जा रही है। अवैध खनन का यह खेल एमपी की सरहद पर बिल्हरका गांव के पास हो रहा है।
उधर, बालू के वाहनों की धमाचौकड़ी से मेन केनाल नहर मीना पुल ध्वस्त होने की कगार पर है। यह कई फिट धंस गया है। इस पुल से मौरंग के वाहन पुंगरी करतल होकर नरैनी और कालिंजर की तरफ आ रहे हैं। नदी की मुख्य धारा का बालू भरी बोरियों से बांधकर छतरपुर जिले की ओर मौरंग भरे ट्रकों को पार कराया जा रहा है। मध्य प्रदेश के ट्रक भी मौरंग ढो रहे हैं। नरैनी कोतवाली और करतल चौकी पुलिस खामोश है।
हाल ही में मध्य प्रदेश खनिज विभाग द्वारा चांदी पाटी केन नदी खदान मेें बालू का खनन शुरू कराया गया है। यूपी के बिल्हरका में अवैध खनन हो रहा है। नदी में बालू (मौरंग) भरी बोरियां डालकर पानी का बहाव कम कर अवैध खनन तेजी से किया जा रहा है।
बिना पट्टे के बालू का अवैध खनन
बांदा। भारतीय किसान सेना नेताओं ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर रेहुंटा गांव में अवैध खनन और किसानों की जमीन व सड़कों को खरा होने से बचाने के लिए मांग की है। कहा कि बालू माफिया खेतों से रास्ता बनाकर बालू भरे वाहन निकाल रहे हैं। रोकने पर जान से मारने की धमकी दे रहे हैं।
रेहुटा गांव में बालू खनन का कोई पट्टा नहीं है। इसके पहले भी अधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है। पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। कभी भी किसानों और बालू माफियाओं के बीच संघर्ष हो सकता है। शिकायती पत्र भेजने वालों में किसान सेना के मंडल संगठन मंत्री राम प्रकाश मिश्र सहित अखिलेश मिश्र, मोहन सिंह, रणजीत सिंह गौतम, राममनोहर सिंह, चंद्र किशोर प्रजापति आदि शामिल हैं।