केन-बेतवा नदी गठजोड़ परियोजना के विरोध में स्वयंसेवी संगठनों की अगुवाई में प्रभावित होने वाले किसानों आदि ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सामूहिक हस्ताक्षरों वाला बैनर भेजने की तैयारी शुरू कर दी है।
साथ ही 27 दिसंबर को हिनौता (पन्ना) गांव में प्रस्तावित दूसरी जनसुनवाई में भी एक बार फिर योजना के लाभ और हानि गिनाए जाने की तैयारी की जा रही है। छतरपुर के सिलौन गांव में 23 दिसंबर को हुई जन सुनवाई के बाद परियोजना से प्रभावित हो रहे गांवों में इसके विरोध में सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
गंगऊ गांव के किसान बाला प्रसाद यादव ने कहा कि 3.16 लाख रुपये मुआवजा देने की बात कही गई, लेकिन मुआवजा नहीं मिला। स्वयंसेवी और आरटीआई एक्टिविस्ट आशीष सागर दीक्षित ने कहा कि परियोजना से प्रस्तावित बांध के डूब क्षेत्र में आबाद 10 गांवों के करीब 8500 किसान विस्थापित हो रहे हैं। इनमें 80 फीसदी आदिवासी हैं। यह इलाका पन्ना टाइगर वन क्षेत्र में है।