खैराडा जंक्शन का रेलवे प्लेटफार्म।
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बांदा। जंक्शन का नाम आते ही आमतौर पर तमाम सुविधाओं से लैस रेलवे स्टेशन की कल्पना जेहन गूंज जाती है लेकिन चित्रकूटधाम मंडल में मानिकपुर के बाद दूसरे नंबर का जंक्शन खैराडा में ऐसा कुछ नहीं है। यहां प्लेटफार्म भी अब तक मिट्टी और कीचड़ वाला है। यात्रियों के लिए पर्याप्त टीनशेड नहीं है। पूरे प्लेटफार्म पर एक मात्र हैंडपंप है। यहां लगभग यात्री ट्रेनों का ठहराव है। सीमावर्ती मध्य प्रदेश के यात्री भी इसी रेलवे स्टेशन से ट्रेनों पर सवार होते या उतरते हैं।
बांदा रेलवे स्टेशन से महज 10 किलोमीटर दूर स्थित खैराडा जंक्शन से झांसी-कानपुर और बांदा के लिए रेलवे लाइनें हैं। अक्सर दो या तीन ट्रेनें एक ही समय पर ठहर जाती हैं। लेकिन प्लेटफार्म सिर्फ एक है वह भी कच्चा है। यात्रियों को प्रतीक्षालय जैसी कोई सुविधा नहीं है। कई ट्रेनों के एक साथ ठहर जाने पर गर्मी में इकलौता हैंडपंप नाकाफी होता है। रोशनी की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। रात में उप प्रबंधक के कक्ष के बाहर ही उजाला होता है। शेष पूरे प्लेटफार्म में अंधेरे में यात्री ट्रेनों से उतरते और चढ़ते हैं। सुरक्षा व्यवस्था भी नगण्य है।