रानी दुर्गावती का जन्म स्थान कालिंजर दुर्ग ही है।
यह तथ्य निर्विवाद और प्रमाणित है। रानी के जीवन पर इतिहासविद डॉ. कल्पना
जायसवाल (दिल्ली) ने हाल ही में दुर्लभ ताम्रपत्र खोजने का दावा किया।
ताम्रपत्र
में दुर्गावती की जन्म कुंडली अंकित होने की भी बात कही है। यह कुंडली
संस्कृत में लिखी बताई गई है। इसके मुताबिक रानी का जन्म पांच अक्तूबर 1524
को हुआ था। पांच अक्तूबर को यहां दुर्गावती का जयंती समारोह मनाया जाएगा।
रानी दुर्गावती स्मारक समिति संयोजक बीडी गुप्ता ने यह जानकारी दी।
उन्होंने
कहा कि नई खोज के बाद रानी का जन्म स्थान कालिंजर दुर्ग अकाट्य रूप से
सिद्ध हो गया है। उन्होंने मांग की कि रानी की गरिमा और गौरव के अनुरूप
प्रेरक स्मारक के रूप में कालिंजर में ताज महल बनना चाहिए। इस बारे मेें
केंद्र और राज्य सरकारों तथा उद्योगपतियों से आग्रह किया जाएगा।
सांसद
भैरो प्रसाद को भी अवगत कराया गया है। उन्हाेंने बताया कि अकबर के दरबारी
इतिहासकार अबुल फजल ने अपने प्रसिद्ध इतिहास ग्रंथ अकबरनामा में रानी
दुर्गावती का पिता शालिवाहन और जन्म स्थान राठ बताया है। अब ताम्रपत्र
मिलने के बाद यह भ्रामक साबित हुआ है।