अतर्रा। गरीबों का कोई पुरसाहाल नहीं है। कोरोना संक्रमण काल में गरीबों के बच्चे कबाड़ बीनकर घर का खर्च चला रहे हैं। बिना मास्क और सफाई के यह बच्चे गलियों-कूचों में थैला लटकाए देखे जा सकते हैं।
नरैनी रोड स्थित गौरा बाबा धाम मंदिर प्रांगण में नौ से 15 वर्ष की उम्र के चार नाबालिग प्लास्टिक की बोतल, लोहा, गत्ता इकट्ठा करने में मशगूल रहे। बारह साल का बालक गंगेही तालाब के पास का रहने वाला है। परिवार में माता-पिता के अलावा तीन भाई व चार बहन हैं। ग्यारह साल का बालक सिविल लाइन में रहता है। उसके माता-पिता समेत तीन भाई व चार बहने हैं। तेरह साल का एक बालक गोखिया मोड़ में रहता है। घर में माता-पिता समेत दो अन्य भाई हैं।
नौ साल के बालक के घर में माता-पिता समेत कुल पांच भाई व बहन हैं। सभी के माता-पिता मजदूरी करते हैं। इन चारों बच्चों की टोली पिछले सात महीने से लगातार सुबह घरों से निकलकर कबाड़ इकट्ठा करने का काम करते हैं। इसे बेचकर राशन सामग्री के लिए पैसे का इंतजाम करते हैं। अनुसूचित जाति के इन बच्चों ने बताया कि न चाहते हुए उन्हें कबाड़ बीनना पड़ता है। घर की रोजी-रोटी चलाने के लिए वह यह करने को मजबूर हैं।