बांदा। मोहर्रम माह में शोहदा-ए-कर्बला को खिराजे अकीदत (श्रद्धांजलि) पेश करने का सिलसिला जारी है। 15वीं मोहर्रम की रात बृहस्पतिवार को अलीगंज स्थित मदरसा दारुल उलूम रब्बानिया रोड पर 19वां जलसा एक शाम खानदाने हुसैन के नाम आयोजित हुआ। नात के साथ शोहदा-ए-कर्बला की शान और याद में भी कलाम गूंजे।
मौलाना सैय्यद मोहम्मद मक्की राशिद (कछौछा) ने कहा कि कर्बला की शहादत जमीन से लेकर आसमान तक गूंजी। यह हमेशा तरोताजा रहेगी। शोहदा-ए-कर्बला के दीवाने उन्हें याद करते रहेंगे। मौलाना मोहम्मद नईमुद्दीन अजीजी (मुबारकपुर) ने कहा कि कर्बला के मैदान की जंग इंसानियत की हिफाजत के लिए थी। सल्तनत या हुकूमत के लिए नहीं। जलसे में मशहूर शायर कोयल लखनवी (झारखंड) ने भी कलाम पेश किए। सदारत सैय्यद मेराज मसूदी (अकील मियां) ने की। निजामत (संचालन) हस्सान मसूदी और जीशान रब्बानी ने की। मंच पर सैय्यद आबिद रब्बानी, मौलाना सैय्यद अतरह रब्बानी (वाजिद मियां), मौलाना खुश्तर रब्बानी, मौलाना राशिद रब्बानी आदि मौजूद रहे।