जिला अस्पताल में भर्ती जमालपुर गांव के बुखार पीड़ित बच्चे।
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बांदा। जौरही पीएचसी क्षेत्र के जमालपुर गांव से जिला अस्पताल आने वाले डेंगू व बुखार से ग्रसित मरीजों की लाइन नहीं टूट रही। बुधवार की रात से अब तक 16 नए मरीज भर्ती कराए गए हैं। इनमें सगे दो भाई-बहन समेत तीन को कानपुर रिफर किया गया। उधर, बुखार से पीड़ित व्यक्ति ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में डीडीटी का छिड़काव कर रही है। जमालपुर गांव में बुखार के प्रकोप की रोकथाम के लिए किए जा रहे स्वास्थ्य विभाग के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। रोजाना 10 से 15 बुखार पीड़ित अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं।
बुधवार की रात भर्ती हुए रामशरण के 10 वर्षीय पुत्र राज व 7 वर्षीय पुत्री प्रेमसुती और भन्ना (40) पुत्र चिरंगा बढ़ई को हालत में सुधार न होने पर डाक्टरों ने कानपुर रिफर कर दिया। देव सिंह (13) पुत्र दलजीत सिंह, शिवलोचन (45) पुत्र लोटन, आनंद उर्फ नंदू (16) पुत्र शिवमंगल, संतोष (32) पुत्र भूरा, शैलकुमारी (40) पत्नी प्रदीप कुमार, भूरी (25) पत्नी शिवचरन, नेहा वाजपेयी (21) पत्नी उमाशंकर, विमल (14) पुत्र रामविशाल, खुशी त्रिपाठी (12) पुत्री शिवचरन और कमल कुमारी (24) पत्नी राहुल (बरगहनी), मूलचंद्र (58) पुत्र परदेसी (पचुल्ला), देवराज (70) पुत्र मंगली (पखरौली) व मांशू (8 माह) पुत्र संतोष कुमार (करछा) अस्पताल में भर्ती हैं। लगातार प्लेटलेट्स में गिरावट होने पर डेंगू की आशंका जताई जा रही है। उधर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बबेरू क्षेत्र के तरांय गांव निवासी चुन्नीलाल (45) पुत्र टिरिया की बुधवार की रात मौत हो गई। घरवालों ने बताया कि उसे कई दिनों से बुखार आ रहा था। हालत में सुधार न आने पर यहां जिला अस्पताल में भर्ती कराया। डायरिया के बाद अब बुखार का जबरदस्त प्रकोप है। अस्पताल के अधिकांश पलंग इनके मरीजों से फुल हैं। स्वास्थ्य विभाग के दावे भी हवाई साबित हो रहे हैं।
डेंगू के डर से राखी बांधने नहीं आई बहन
बांदा। डेंगू और बुखार के कहर से जूझ रहे जमालपुर गांव के लोग दहशत में हैं। हालत यह है कि रक्षाबंधन जैसे महत्वपूर्ण पर्व में बहनों के न आने पर भाइयों की कलाई सूनी रही। इसकी बानगी अस्पताल में भर्ती खुशी के पिता शिवचरन तिवारी हैं। उन्होंने बताया कि डेंगू के भय से महोबा के एक गांव में ब्याही उसकी बहन माया राखी बांधने नहीं आई। इसी तरह तमाम लोग गांव छोड़कर रिश्तेदारों के यहां पनाह लिए हैं। इनमें ब्रजमोहन, प्रदीप कुमार व शिवशरण शामिल हैं। यह तीनों परिवार समेत बांदा में डेरा डाले हैं।