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एक ही घर में पूरा परिवार रहना खुशनसीबी : मौलाना

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बांदा। हमारे मुल्क की ये खुशनसीबी है कि यहां ज्यादातर घरों में एक ही छत के नीचे पूरा परिवार और कुनबा मिलजुल कर आबाद है। दूसरे मुल्कों में ऐसा बहुत कम है। ये बातें मंगलवार की रात तिंदवारा के मदरसा सुबहानिया में आयोजित इस्लाहे मआशरह कांफ्रेंस में जामा अरबिया, हथौरा के मौलाना स्वालेह आजमी ने कही।
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समाज और खासकर मुस्लिमों में दीनी और दुनियावी तालीम के मुद्दों पर उलेमाओं ने अलग-अलग मौजू (विषय) पर खिताब किया। मौलाना मुसर्रत ( हथौरा) ने कहा कि इस्लाम आपसी मेल मोहब्बत और दीन पर सच्चाई से अमल का पैगाम देता है। जलसे की सदारत कर रहे जामिया हथौरा के नाजिम हाफिज कारी मौलाना हबीब अहमद ने कहा कि दुनियावी तालीम के साथ दीनी तालीम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस्लाम इंसानों में मोहब्बत और अच्छे एखलाक का पैरोकार है। मौलाना हबीब की दुआ के साथ जलसे का समापन हुआ।
मशहूर नातिया शायर कारी अशफाक (बहराइच) और कारी फहीम (पिनहानी) ने कलामों से समा बांधा। जामिया हथौरा के मुफ्ती मौलाना नजीब अहमद कासमी ने इस्तकबाल कर शुक्रिया अदा किया।
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मदरसा कमेटी सदर शराफत हुसैन समेत अमीनुद्दीन, अजीमउल्ला, सत्तार, अली बक्श , इस्माइल, अलताफ, नासिर आदि ने उलेमा और शायरों का स्वागत किया। इसके पूर्व मदरसा के 100 से ज्यादा बच्चों को इनाम दिए गए। मदरसा शिक्षक मौलाना इनामुल हक और हाफिज साजिद ने बच्चों को शाबासी दी। जलसे में मौलाना हाफिज सैय्यद अनस अहमद ( हथौरा), मौलाना सिराज, मौलाना मिस्बाहुद्दीन और एआईएमआईएम जिलाध्यक्ष वाजिद अली, हाजी शब्बीर अली बबलू, हाजी मो. शाकिर, पूर्व डीडीसी मो. इदरीस, मुजीब अहमद भी शरीक रहे।
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