-टीएचआर प्लांट में खरीद से पैकिंग तक गड़बड़ी का आरोप, महिलाओं ने मांगी जांच
-एक्सपायरी माल मिलाने, घटतौली और पोषाहार में आटे की मात्रा बढ़ाने की शिकायत
अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। सदर तहसील के दुरैड़ी गांव में संचालित प्रेरणा लघु उद्योग टीएचआर प्लांट में काम करने वाली स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने कच्चे माल की खरीद से लेकर पोषाहार की पैकिंग तक में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए हैं। जिलाधिकारी को भेजी शिकायत में महिलाओं ने एक्सपायरी माल को नए माल में मिलाने, घटतौली करने और निर्धारित पोषक खाद्य पदार्थों की जगह गेहूं के आटे का अधिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। समूह की महिलाओं ने मामले की गोपनीय जांच कराकर कार्रवाई की मांग की थी। उनका आरोप है कि शिकायत पर निष्पक्ष जांच नहीं हुई और मामला दबा दिया गया।
मथनाखेड़ा निवासी आरती देवी, मोहनपुरवा निवासी चंद्रमुखी समेत अन्य महिलाओं ने शिकायत में कहा है कि प्लांट में कच्चे माल की खरीद में गड़बड़ी की जा रही है। खरीदे जाने वाले माल की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं होने का भी आरोप लगाया है। महिलाओं के मुताबिक, एक्सपायरी डेट के माल को नए माल में मिलाकर पैकेटों में भरने और निर्धारित मात्रा से कम पोषाहार देने के लिए घटतौली किए जाने की शिकायत भी की गई है।
महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया है कि पोषाहार तैयार करने में निर्धारित पोषक खाद्य पदार्थों की जगह गेहूं के आटे का अधिक इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे तैयार उत्पाद की गुणवत्ता और उसमें पोषक तत्वों की निर्धारित मात्रा को लेकर सवाल खड़े होते हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए उत्पाद के नमूनों की जांच जरूरी है।
लाभांश मांगने पर हटाने की धमकी का आरोप
शिकायत करने वाली महिलाओं ने प्लांट के संचालन में पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को प्लांट का लाभांश नहीं दिया जा रहा है। इस संबंध में आवाज उठाने पर उन्हें काम से निकालने की धमकी दी जाती है। महिलाओं ने जिलाधिकारी से शिकायत की जांच गोपनीय तरीके से कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। इसके बावजूद उनकी शिकायत पर निष्पक्ष जांच नहीं होने का आरोप लगाया है।
नमूनों की जांच से ही सामने आएगी पोषाहार की गुणवत्ता
टीएचआर प्लांट में तैयार होने वाले पोषाहार में निर्धारित मात्रा के अनुरूप पोषक तत्व मौजूद हैं या नहीं, इसकी पुष्टि प्रयोगशाला में नमूनों की जांच से ही हो सकती है। एक्सपायरी माल मिलाने, घटतौली और आटे की मात्रा अधिक रखने जैसे आरोपों की पड़ताल के लिए कच्चे माल के स्टॉक, खरीद अभिलेख, उत्पादन और पैकिंग की प्रक्रिया की जांच भी जरूरी है। ऐसे में सवाल है कि गंभीर आरोपों के बावजूद उत्पाद के नमूने लेकर गुणवत्ता की जांच कराई गई या नहीं।
-
वर्जन
सभी शिकायतों की जांच हो चुकी है। आरोपों से संबंधित रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। अब शासन स्तर से ही कार्रवाई की जाएगी। - दिवाकर सिंहइस, डीसी एनआरएलएम