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समन्वित कृषि पद्धति से संवरेगी बुंदेली किसानों की किस्मत

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Integrated farming method will boost the fate of Bundeli farmers - फोटो : BANDA
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मुशर्रफ खान (संवाद)
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बांदा। बुंदेली किसान समन्वित कृषि इकाई से अपनी किस्मत संवार सकते हैं। यदि किसानों ने कृषि विश्वविद्यालय के समन्वित कृषि इकाई (आईएफएस) मॉडल पर अमल किया तो उनकी जेब 12 महीने भरी रहेगी।
पथरीली भूमि और सिंचाई के मजबूत साधन न होने से बुंदेली किसान भरपूर उपज नहीं ले पाता। कभी दैवी आपदा तो कभी कुछ और कारणों से उनके हाथ अक्सर खाली ही रहते हैं। उनकी दशा और दिशा सुधारने के लिए बांदा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने विश्वविद्यालय कैंपस में एक हेक्टेयर में एक मॉडल प्रस्तुत किया है। इस मॉडल का नाम समन्वित कृषि प्रणाली इकाई (इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम यूनिट) रखा है।
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इसमें मुर्गी पालन, बतख पालन, बकरी पालन, मछली पालन, सब्जी, चारा, फल और मौसमी फसल को अलग-अलग क्षेत्र में बांटा है। मुर्गी व बकरी पालन के लिए छोटे-छोटे ग्रीन हाउस और बतख और मछली पालन के लिए तालाब खोदा गया है। सब्जी और मौसमी फसल के लिए अलग व्यवस्था की है। कुल मिलाकर एक हेक्टेयर में खेती का गुलदस्ता (नमूना) प्रस्तुत किया है। कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि किसान इस मॉडल से 12 महीने आमदनी कर सकते हैं।
तीन लाख में तैयार होगा मॉडल
आईएफएस के जनक व विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक (शस्य विज्ञान) डॉ. अनिकेत एच काल्हापुरे ने बताया कि इस मॉडल को तैयार करने में किसान को तीन लाख रुपये खर्च करने पड़ेंगे। अगर सरकारी सहायता मसलन ड्रिप, स्प्रिकंलर तालाब खुदाई, बकरी पालन इत्यादि के लिए सरकारी सहायता ली जाए तो किसान को काफी कम पूंजी लगानी पडे़गी।
कृषि मंत्री ने भी सराहा
शुक्रवार को कृषि महाविद्यालय आए कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने भी समन्वित कृषि प्रणाली इकाई की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह मॉडल लघु और सीमांत किसानों की आर्थिक दशा सुधारने में महत्वपूर्ण साबित होगा।
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आईएफएस मॉडल के जरिये बुंदेलखंड का किसान अलग-अलग खेती के उपक्रमों से साल में 12 महीने अपनी आमदनी कर सकता है। इस मॉडल को तैयार करने में छह महीने से तैयारी चल रही थी। किसानों के लिए यह बेहतर मॉडल है। लोकार्पण के बाद अब यह किसानों के लिए प्रस्तुत कर दिया गया है।-डॉ. बीके गुप्ता, जनसंपर्क अधिकारी, कृषि विश्वविद्यालय।
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