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बीमा कंपनी ने 25 फीसदी भी क्लेम नहीं दिया

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दैवी आपदा की मार से जूझ रहे किसानों का पुरसाहाल नहीं है। उन्हें फसल बीमा क्लेम के लिए बैंकों और कृषि विभाग के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। बीमा एजेंसी का कोई अधिकारी उनसे बात करने को तैयार नहीं है। फौरी तौर पर बीमा कंपनी को उन्हें क्लेम का 25 फीसदी भुगतान करना है।
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इसके लिए जनपद के 9 बैंकों ने 39,948 किसानों की लिस्ट बीमा कंपनी को भेज दी है। इन किसानों ने 6.96 करोड़ प्रीमियम जमा किया था, लेकिन बीमा कंपनी ने अब तक मात्र दो बैंकों के 1203 किसानों को सिर्फ 59.77 लाख रुपये भेजा है। जबकि 25 फीसदी की दर से इन किसानों को 1,19,11,000 रुपये मिलने चाहिए थे।

शासन और प्रशासन की तमाम सख्ती के बावजूद बीमा कंपनी की मनमानी पर लगाम नहीं लगी। दो माह पूर्व जबरदस्त ओला और बारिश से बुरी तरह बर्बाद हुए किसानों को फौरी तौर पर बीमे की राशि मिलनी चाहिए थी। इसमें 25 फीसदी तो तत्काल देने का प्रावधान है।
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हाल ही में जनपद के लीड बैंक सेल ने बीमा कंपनी एचडीएफसी एग्रो जीआईसी लिमिटेड, लखनऊ को 9 बैंकों के जरिए फसल बीमा कराने वाले 39,948 किसानों का ब्योरा भेजा था। बीमा कंपनी ने सिर्फ दो बैंकों डिस्ट्रिक कोआरेटिव बैंक और इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक के 1203 किसानों के लिए 59.77 लाख रुपये भेजा, जबकि इन्हें करीब 1.19 करोड़ रुपये दिए जाने चाहिए।

अन्य 7 बैंकों के बीमित किसानों को अब तक धेला नहीं दिया गया। परेशान हाल किसान बैंक और कृषि विभाग के चक्कर लगा रहे हैं। बीमा कंपनी का कोई अधिकारी यहां रहता ही नहीं। फोन पर भी बात नहीं करते।

हम ब्योरा भेज चुके हैं, अब बीमा कंपनी की बारी
बांदा। लीड बैंक सेल प्रबंधक (एलडीएम) एसके झा ने बताया कि विभिन्न बैंकों ने 31 दिसंबर 2014 तक बने केसीसी कार्डों के आधार पर 39,948 किसानों का ब्योरा बीमा कंपनियों को भेज दिया है। अब गेंद बीमा कंपनी के पाले में है। जो ब्योरा बैंकों ने भेजा है। उसे बीमा कंपनी ने स्वीकार भी कर लिया है।

उसमें कोई आपत्ति या अस्वीकार करने की सूचना नहीं दी है। सिर्फ दो बैंकों के गिने-चुने किसानों को जो भुगतान किया है वह भी गलत है। यह धनराशि न तो किसानों की संख्या से मेल खाती है न ही उनकी बीमित राशि से। जब तक बीमा कंपनी बीमित राशि का क्लेम नहीं भेजेगी तब तक किसानों के खाते में पैसा कैसे आ सकता है।
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