गले में फंसा सिक्का निकाले जाने के बाद मेडिकल कालेज में बैठा मासूम आयुष।
बांदा। खेल-खेल में एक रुपये का सिक्का निगल गए चार वर्षीय मासूम की जान पर बन आई। माता-पिता की आर्थिक हैसियत इतनी नहीं थी कि महानगर ले जाकर 25-30 हजार रुपये खर्च उसकी जान बचाते, लेकिन यही काम मात्र 70 रुपये की सरकारी फीस पर मेडिकल कालेज में निपट गया।
स्वराज कालोनी निवासी अशोक सिंह के चार वर्षीय पुत्र आयुष ने तीन दिन पहले खेल-खेल में मुंह में एक रुपये का सिक्का ले लिया। वह अंदर चला गया और खाने की नली में जा फंसा। खाने के साथ मासूम का पानी भी बंद हो गया। उसकी जान पर बन आई। पिता इलाज के लिए कहीं बाहर नहीं ले जा सके। वह यहां मेडिकल कालेज गए और ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. भूपेंद्र से अपने बच्चे की जान बचाने की फरियाद की।
डॉ. भूपेंद्र ने पूरी सहानुभूति दर्शाते हुए बच्चे को भर्ती कर लिया और मात्र 70 रुपये के सरकारी यूजर चार्ज पर बच्चे का कोई भी आपरेशन किए बिना दूरबीन पद्धति से गले में फंसा सिक्का निकाल लिया। उन्होंने बताया कि ईसोफेगो स्कोप द्वारा प्वाइंट कैचर से पकड़कर सिक्के को निकाला गया। इसमें मात्र 15 से 20 मिनट लगे। डॉ. भूपेंद्र को मुताबिक मेडिकल कालेज में इस तरह का यह पहला आपरेशन व इलाज था। महानगरों में प्राइवेट अस्पताल इसी आपरेशन और इलाज का 25 से 30 हजार रुपये वसूलते हैं।