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Banda News: समिति में खाद लेने के बाद किसान की अंगुली पर लगेगी स्याही

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बांदा। डीएपी के लिए किसान तड़के से लाइन लगा रहे हैं। उन्हें एक बार में एक या दो बोरी खाद दी जा रही है। खेत के लिए खाद पर्याप्त न होने पर दूसरे दिन लाइन में लगकर फिर डीएपी लेते हैं। अधिकारियों ने अब इसका काट निकाला है। खाद लेने के बाद किसान की अंगुली में चुनाव की तर्ज पर स्याही लगेगी। इससे वह दोबारा लाइन में नहीं लग पाएंगे। यदि आए भी तो उन्हें बाहर कर दिया जाएगा। इससे किसानों के सामने और संकट बढ़ गया है।
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चित्रकूटधाम मंडल में इस वर्ष रबी सीजन में करीब नौ लाख हेक्टेयर फसलों की बुआई होती है। इसमें करीब 50 हजार टन डीएपी खाद की जरूरत होती है। इसमें 32 हजार टन खाद सहकारी समितियों व अन्य केंद्रों के जरिए किसानों को दी जानी थी। बाकी की खाद प्राइवेट दुकानों के भरोसे पूर्ति होती है। नैनो डीएपी खपाने के प्रयास में अधिकारियों ने खाद में कटौती कर दी है। अभी तक दो रैक डीएपी की आ जानी चाहिए, लेकिन पखवारे भर से चारों जिलों में खाद नहीं मंगाई गई।
अधिकारियों का मानना है कि डीएपी खाद किसानों को नहीं मिलेगी तो मजबूरी में नैनो (तरल) खाद लेंगे। वहीं किसानों का कहना है कि नैनो डीएपी इसलिए नहीं ले रहे हैं, कि उनके पास छिड़काव के संसाधन नहीं हैं। सात ही इसकी उपयोगिता की भी जानकारी नहीं है। ऐसे में डीएपी की बोरी लेना मजबूरी है। मंडल में करीब 10 दिन से प्रीपोजशिनिंग स्टॉक में उपलब्ध खाद को समितियों में पहुंचाया जा रहा है।
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दो दिन में एक ट्रक समिति में जाता है। इसमें 500 टन खाद होती है। यदि एक किसान को दो बोरी भी दी तो यह ढाई सौ किसानों में सिमट जाती है। जबकि समिति में हर रोज पांच सौ से छह सौ किसान लाइन में लगते हैं। दो बोरी मिलने के बाद फिर दूसरे दिन दूसरी समिति में कतार में घुस जाते हैं। उनका कहना है कि दस बीघे खेत बोने में उन्हें कम से कम पांच बोरी डीएपी चाहिए। इस कारण दोबारा लाइन लगानी पड़ती है। उधर, अधिकारियों ने किसान दोबारा खाद न ले, इसके लिए अब स्याही लगाने की पहल की है। केंद्र प्रभारी अंगूठा लगवाने के बाद उसकी अंगुली में स्याही लगा रहे हैं। जब तक अंगुली में स्याही लगी रहेगी, वह लाइन में नहीं लग पाएगा। डीसीडीएफ में खाद लेने आए तिंदवारा के अरविंद तिवारी का कहना है कि इससे तो किसान बर्बाद हो जाएंगे। उनके खेत बोने के लिए पड़े रहेंगे। यह किसानों के साथ ज्यादती है।

डीएपी की बोरी 1350, लिए जा रहे 1355
शासन से डीएपी के रेट 1350 रुपये प्रति बोरी की दर से निर्धारित किए गए हैं। वहीं केंद्रों में उनसे 1355 रुपये लिए जा रहे हैं। प्रभारियों का कहना है कि पांच रुपये प्रति बोरी भाड़ा के लगते हैं। वहीं दूर कमासिन, नरैनी क्षेत्र की समितियों में कहीं 50 तो कहीं 100 रुपये ज्यादा लिए जा रहे हैं। किसानों को कहना है कि उनकी ज्यादा पैसा देना मजबूरी है। अधिकारियों को पता है, पर कोई कार्रवाई नहीं करते हैं।
वर्जन...
किसान एक जगह खाद लेने के बाद दूसरी समिति में जाकर लाइन लगा देते हैं। इससे खाद संकट उत्पन्न होता है। इसलिए केंद्रों में अब उनकी अंगुली में स्याही लगाई जा रही है। -सहायक आयुक्त व निबंधक, सहकारी समितियां।
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