फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Banda News: महंगाई ने घटाया रावण का कद, दो फीट छोटा हो गया पुतला

विज्ञापन
विज्ञापन
बांदा। जीएसटी की संशोधित दरें भी राहत नहीं दे पाईं। महंगाई की वजह से रावण का कद छोटा हो गया। पिछले साल की अपेक्षा इस साल रावण का पुतला दो फीट छोटा हो गया है। पिछले साल 19 फीट का पुतला बनाया गया था लेकिन बांस और कागज की कीमतें बढ़ने की वजह से इस साल 17 फीट का पुतला बनाया गया है।
विज्ञापन

रावण का पुतला बनाने वाले शहर के मर्दननाका मोहल्ला निवासी तुफैल अहमद ने बताया कि पुतला बनाने की सामग्री इस साल काफी महंगी हो गई हैं। लोग रावण का पुतला पुरानी कीमत पर ही बनवाना चाहते हैं। ऐसे में पुतले का कद छोटा करके ही सामंजस्य बनाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि पुतला बनाने में कपड़ा, कागज, बांस की पतली कमानियां और रंग-रोगन का इस्तेमाल किया जाता है। इन सबकी कीमतें बढ़ने से लोग बड़ा रावण का पुतला बनवाने से बचते हैं। बड़ा पुतला महंगा पड़ता है।
जीएसटी की दर कम होने की बात पर वह कहते हैं कि इसका कोई असर नहीं पड़ा है। पुतला बनाने का सामान पहले ही खरीद लिया था। इस वजह से यदि कोई चीज सस्ती हुई भी हो तो कह नहीं सकता।
विज्ञापन



दूसरी पीढ़ी बना रही पुतला
तुफैल अहमद ने बताया कि उनके मरहूम अब्बा एजाज अहमद रावण का पुतला बनाते थे। उन्होंने यह काम करीब 80 वर्षों तक लगातार किया। वह ताजिया व अन्य पुतलों का भी निर्माण करते थे। बताया कि सामान महंगा होने के कारण पुतला बनाना भी महंगा हुआ है लेकिन खरीदार उसी दाम पर मांगते हैं। इससे परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
-
पुतला बनाने वाली वस्तुओं के दाम रुपये में
वस्तु पहले अब
बांस 150 280 (प्रति बांस)
कागज 180 290 (प्रति किलो)

सुतली 12 20 (प्रति बंडल)


पांच दिन तक मारा जाता है रावण, एक-दूसरे को पान खिलाने की परंपरा
बांदा। शहर में दशहरे का आयोजन पांच दिनों तक चलता है। यह परंपरा दशकों से चली आ रही है। पांचों दिन अलग-अलग स्थान पर रामलीला का मंचन कर रावण का वध होता है। इसके बाद रावण और मेघनाथ के पुतले फूंके जाते हैं। फिर घर-घर जाकर दशहरा मिलन समारोह आयोजित किए जाते हैं। साथ ही एक-दूसरे को पान खिलाने की परंपरा रही है। यह अब भी कायम है।


प्रागी तालाब से होती है शुरुआत

पर्व की शुरूआत प्रागी तालाब में रावण वध के साथ होती है। इस साल इसकी शुरूआत बृहस्पतिवार से होगी। प्रत्येक दिन अलग-अलग मोहल्लों में रामलीला और दशहरे का आयोजन किया जाएगा। पहले दिन छोटी बाजार, मढ़िया नाका, खुटला, और बन्योटा जैसे इलाकों में रावण वध के बाद दशहरा मनाया गया। दूसरे दिन अलीगंज, खाईपार, बाबूलाल चौराहा जैसे मोहल्लों में रावण वध का मंचन होगा। तीसरे दिन नाई समाज रामलीला समिति द्वारा मानिक कुइयां के मैदान में रावण वध होगा। दशहरा मिलन समारोह भी आयोजित होगा। इस दिन कटरा, बलखंडी नाका और नोनिया मुहाल जैसे इलाकों में दशहरा मनाया जाएगा। चौथे दिन सिविल लाइंस इलाके में जहीर क्लब मैदान में रामलीला का मंचन और रावण वध होगा, जिसके बाद स्वराज कॉलोनी, इंदिरा नगर, और सर्वोदय नगर जैसे इलाकों में दशहरा मिलन मनाया जाएगा। अंतिम दशहरा काशीराम कॉलोनी में पांचवें दिन मनाया जाएगा।



लोग एक दूसरे से मिलते हैं गले

यह पर्व सिर्फ पान खाने का नहीं, बल्कि एक-दूसरे के घर जाकर शुभकामनाएं देने का भी है। नवाबों के समय से चली आ रही यह परंपरा सामाजिक समरसता और प्रेमभाव को बढ़ावा देने के लिए जानी जाती है। शहर का दशहरा सामाजिक समरसता, उत्थान और प्रेम भाव को बढ़ाने वाला है। समयाभाव के चलते लोग एक दिन में सभी को दशहरे की बधाई नहीं दे पाते हैं, इसलिए पांच दिन तक दशहरा चलता है। इसके पहले शहर के अलग अलग स्थानों पर रामलीला मंचन का दौर चल रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें