बांदा। नोएडा की तर्ज पर बुंदेलखंड में औद्योगिक विकास हुआ तो जो पहचान अब तक उसके पिछड़ेपन की चली आ रही है, उस पर उद्योगों के विकास की चमक पड़ जाएगी। रोजगार के रास्ते खुलेंगे तो पलायन रुकेगा। बुंदेलखंड आर्थिक रूप से भी देश में बड़ा योगदान दे सकेगा। यह कहना है जिले के कई उद्यमियों का। उन्होंने मुख्यमंत्री के इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे बांदा समेत पूरे बुंदेलखंड के विकास के लिए बेहतर बताया है।
कैबिनेट की बैठक में बीडा यानि बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण को लेकर मुख्यमंत्री के इस फैसले पर उद्यामियों में खुशी है। फैसले के अनुसार पहले चरण में झांसी के 33 राजस्व ग्रामों की 35 हजार एकड़ जमीन को अधिग्रहीत किया जाएगा। इस जमीन की कीमत 6312 करोड़ रुपये है। इसके बाद उम्मीद जताई जा रही है कि बांदा की ओर सरकार इसे बढ़ाएगी।
जिससे जल्द ही इस क्षेत्र को भी विकास के पंख लग सकेंगे। ऐसा होगा तो क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के लिए गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब आदि अन्य प्रदेशों की ओर जाना नहीं पड़ेगा। उद्यमियों ने इस योजना में सख्त लागू करने की भी अपील की।
उद्योग व्यापार मंडल के वरिष्ठ प्रांतीय उपाध्यक्ष संतोष कुमार गुप्ता का कहना है कि बड़े उद्योगों के लिए सबसे बड़ी समस्या उद्योगपतियों को जमीन की तलाश होती है। लैंडबैंक बनने से उन्हें आसानी से जमीन उपलब्ध हो जाएगी। उधर किसानों को भी उनकी जमीन के सर्किल रेट से चार गुना ज्यादा मुआवजा मिलेगा।
भूरागढ़ औद्योगिक आस्थान के कारोबारी रोहित जैन का कहना है कि लैंड बैंक बनाने के बाद जिन उद्योग पतियों को जमीन दी जाए, उनसे एक साल के अंदर काम शुरू करने का एग्रीमेंट लिया जाए। अक्सर बड़े लोग जमीन आवंटित कराने के बाद उद्योग लगाने में देरी करते हैं। इससे योजना परवान नहीं चढ़ पाती है।