बुंदेलखंड में शिक्षा के प्रति बेटियों में भी रुचि बढ़ रही है। पिछले पांच साल में प्राथमिक शिक्षा में जहां बालिकाओं की संख्या में काफी इजाफा हुआ है, वहीं माध्यमिक शिक्षा में भी इस वर्ष 13 फीसदी बालिकाएं बढ़ी हैं। यूपी बोर्ड परीक्षा में दो साल पहले हाईस्कूल में 11,578 और इंटर में 7063 बालिकाएं थीं। वहीं इस वर्ष हाईस्कूल में 13506 और इंटर में 8706 बालिकाएं बोर्ड परीक्षा में शामिल होंगी।
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान बुंदेलखंड में भी कामयाब हो रहा है। गांव-गांव सुविधाएं बढ़ीं तो बेटियों ने भी विद्यालयों की ओर कदम बढ़ाए। प्राथमिक शिक्षा में जहां 1,80,874 छात्र-छात्राओं में बालिकाओं की संख्या बढ़कर अब 73,699 हो गई है।
वहीं जूनियर में 79,225 छात्र-छात्राओं में 32,621 बालिकाएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। वर्ष 2010 में प्राथमिक में करीब 43 हजार छात्राएं थीं। जूनियर में सिर्फ 24 हजार बालिकाएं स्कूल जाती थीं।
माध्यमिक शिक्षा में भी पिछले तीन सालों में बेटियों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। वर्ष 2015 की बोर्ड परीक्षा में इस वर्ष 13 फीसदी बालिकाओं में इजाफा हुआ है। वर्ष 2012 में हाईस्कूल में कुल 24755 परीक्षार्थियों में 13,177 बालक और 11,578 बालिकाएं थीं।
वहीं इंटर में कुल 15603 परीक्षार्थियों में 8542 छात्र व 7063 छात्राएं थीं। वर्ष 2014 में हाईस्कूल में 25537 परीक्षार्थियों में 13,603 छात्र और 12883 बालिकाएं थीं। इंटर में 11,224 बालक और 10137 बालिकाएं रहीं। वर्ष 2015 में यूपी बोर्ड परीक्षा में बालिकाओं का ग्राफ और आगे बढ़ा।
वर्ष 2015 में हाईस्कूल में 28,525 परीक्षार्थियों में 13,603 छात्र और 14,922 बालिकाएं बोर्ड परीक्षा का इम्तिहान देंगी। इस तरह माध्यमिक शिक्षा विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो बोर्ड परीक्षा के इतिहास में पहली बार बांदा जिले में बालिकाओं का 13 फीसदी ग्राफ बढ़ा है।
बालिकाओं की संख्या में इजाफा के पीछे डीआईओएस एनडी वर्मा ने बताया कि बालिकाओं को अब गांव में ही माध्यमिक शिक्षा की सुविधाएं मिल रही हैं। उन्हें बाहर का मुंह नहीं देखना पड़ता। अभिभावकों में भी बालिका की शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है। यही वजह है कि शिक्षा के क्षेत्र में बालिकाएं अब बालकों से आगे निकल रही हैं।