सुबह दफ्तरों में बैठकर फरियादियों की समस्याएं सुनने का मुख्यमंत्री का फरमान जिले के अफसरों पर बेअसर है। सोमवार को डीएम के निरीक्षण में इसकी असलियत खुल गई।
सुबह 10:30 बजे बिना सूचना विकास भवन पहुंचे डीएम वहां अफसरों की कुर्सियां खाली देख दंग रह गए। सीडीओ, डीडीओ तक नहीं मिले। बाद में उन्होंने 13 अधिकारियों और 15 कर्मचारियों पर अग्रिम आदेशों तक वेतन रोकने की कार्रवाई की।
जिलाधिकारी सुरेश कुमार ने सोमवार को विकास भवन के दफ्तरों का सुबह 10.30 बजे निरीक्षण किया। यहां विकास भवन के मुखिया सीडीओ दफ्तर में नहीं मिले।
नुमाइंदों ने बताया कि वह अभी आए नहीं हैं। वहीं जिला समाज कल्याण अधिकारी केके सिंह व उनके दफ्तर के कर्मचारी भइयालाल, सुनील शुक्ला, संदीप श्रीवास्तव व राजेश पटेल भी अपने पटल से नदारद मिले। जिला विकास अधिकारी कार्यालय में डीडीओ श्रीकृष्ण त्रिपाठी, लिपिक पवन कुमार और रामसिया अनुपस्थित पाए गए।
डीएम ने मत्स्य विभाग में देखा तो यहां भी कर्मचारी रामस्वरूप वर्मा, एनके अग्रवाल व संतोष कुमार गोस्वामी कुर्सियों पर नहीं मिले। उप निदेशक रेशम कार्यालय के अनुरेखक श्याम सुंदर, डीएसओ बिंद्रा प्रसाद बिना कोई सूचना के गायब मिले।
ग्रामीण अभियंत्रण सेवा विभाग में एक्सईएन आरके वर्मा, एई प्रमोद गुप्ता, वरिष्ठ सहायक राजकुमार श्रीवास्तव, एमके मुखोपध्याय दफ्तर में नहीं मिले। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना दफ्तर तो खुला मिला पर यहां एक्सईएन एनके त्रिपाठी, डिस्पैचर खालिद मसूर समेत राजकुमार कुमार श्रीवास्तव आदि सभी गायब मिले।
पीएमजीएसवाई में राजेश निगम, ब्रह्मानंद, राजाबाबू तिवारी, डीसीएनआरएल उदय कुमार पांडेय, जिला कार्यक्रम अधिकारी इशरतजहां, डीओ पीआरडी आरपी त्रिपाठी, वैकल्पिक ऊर्जा विभाग (नेडा) के परियोजना अधिकारी सुरेंद्र कुमार नदारद मिले। डीएम ने कहा कि पहली बार निरीक्षण में लापरवाह अधिकारियों का सिर्फ अग्रिम आदेशों तक वेतन रोका गया है और स्पष्टीकरण मांगा गया है। यदि आगे भी यही रवैया रहा तो कड़ी कार्रवाई होगी।