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Banda News: राम को पाना है तो आचरण संयम जरूरी

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खप्टिहाकलां। इंद्रियों को नियंत्रण में रखकर संयम और धर्म का पाठ अदा करने से ही हम राम को पा सकते हैं। इसका बड़ा उदाहरण रावण और दशरथ के जीवन से समझा जा सकता है। धर्म का पाठ अदा करने वाले दशरथ को राम मिले तो काम भोग में रहने वाले दशानन के घर मेघनाथ ने जन्म लिया।
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कस्बे के सिद्ध पीठ पाथादाई मंदिर पर चल रही वाल्मीकि रामायण राम कथा के पांचवें दिन गुरुवार को अयोध्या धाम से पधारीं साध्वी आचार्या मांडवी अनुचरी ने कहा कि भगवदगुणों का चिंतन, अनुसंधान ही कथा का उद्देश्य है। साध्वी अनुचरी ने कहा कि रामायण के दो पात्र दशरथ और दशानन, एक धर्मात्मा है तो एक दुरात्मा। अपनी दसों इंद्रियों पर संयम रखने वाले धर्मात्मा दशरथ के यहां राम प्रगट होते हैं तो दुरात्मा रावण के यहां काम रूप मेघनाद प्रगट होते हैं।इस कथा से यही शिक्षा मिलती है कि जीवन में यदि राम को प्रगट करना है तो हमें संयम और धर्म का आचरण करना होगा। अन्यथा काम के वशीभूत जीवन पतनोन्मुख होकर विनष्ट हो जाता है।
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