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सूखा संसद में उठाएं तो बने बात

Fri, 22 Jan 2016 11:21 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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बांदा। कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी सातवीं बार बुंदेलखंड की धरती पर कदम रख रहे हैं। फर्क इतना है कि इससे पहले वह जब भी वे आए, केंद्र में उनकी सत्ता थी।
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इस बार वे लोकसभा में सबसे बड़े विपक्षी दल के सांसद की हैसियत से यहां आए हैं। पिछले छह दौरों की कुछ उपलब्धि मानी जाए तो सिर्फ बुंदेलखंड पैकेज है, जिसमें आंकड़ों की बाजीगरी ज्यादा हुई।

न बुंदेलखंड बदला न किसानों की हालत सुधरी। अब वे सरकार में नहीं हैं तो यही उम्मीद की जा सकती है कि बुंदेलखंड के सूखे को वे संसद में ठीक उसी तरह उठाएं जैसे जीएसटी का मुद्दा।
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राहुल गांधी ने बुंदेलखंड की तरफ पहला रुख वर्ष 2007 में किया था। तब उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव चल रहे थे। राहुल ने कांग्रेस प्रत्याशियों को जिताने के लिए कड़ी मशक्कत की।

बांदा शहर में कांग्रेस प्रत्याशी विवेक सिंह के पक्ष में रोड शो किया था। विवेक सिंह चुनाव जीते थे। दूसरा दौरा वर्ष 2008 में हुआ। रात्रि विश्राम बांदा शहर के होटल में किया। उन दिनों किसान आत्महत्याओं, भुखमरी और तंगहाली के लिए चर्चित नहरी गांव गए थे।

वहां कई परेशानहाल किसान परिवारों से मिले और गांव में हो रही एक शादी में शरीक होकर वर-वधू को आशीर्वाद भी दिया था।

नहरी वालों में उम्मीद जागी थी कि केंद्र में सत्तारूढ़ दल का एक बड़ा नेता उनके बीच आया है तो गांव का कुछ भला जरूर होगा। पर इन उम्मीदों पर भी पानी फिर गया।

राहुल गांधी ने तीसरी बार बुंदेलखंड का रुख वर्ष 2012 में किया। तब तत्कालीन बसपा विधायक के आवास पर सामूहिक दुराचार का शिकार शीलू को लेकर सियासत जमकर गर्माई थी।

राहुल बांदा आए और शहबाजपुर जाकर शीलू से मिले। उसे घटना की सीबीआई जांच का भरोसा दिलाया। हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई जांच हुई।

वर्ष 2012 में बुंदेलखंड का सूखा फिर सुर्खियों में था। ऐसे में राहुल गांधी तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लेकर बुंदेलखंड आए। बांदा में राहुल और मनमोहन की संयुक्त जनसभा हुई।

मनमोहन सिंह ने बुंदेलखंड में पेयजल के लिए 200 करोड़ देने की घोषणा की, पर इस पैसे का भी वही हश्र हुआ जो इसके पहले योजनाओं के बजट का होता रहा। बुंदेलखंड के एक भी गांव को भरपूर पानी नहीं मिला और पैसा ठिकाने लग गया।

बुंदेलखंड के लोगों को मायूसी हाथ लगी। राहुल गांधी का वर्ष 2012 में यूपी विधानसभा चुनाव में फिर बुंदेलखंड आना हुआ। उन्होंने खुरहंड, अतर्रा और तिंदवारी में चुनावी जनसभाएं संबोधित कीं।

तिंदवारी को छोड़कर कहीं भी कांग्रेस प्रत्याशी नहीं जीते। अब शनिवार (23 जनवरी) को राहुल एक बार फिर बुंदेलखंड में हैं। उनका यह भ्रमण इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि केंद्र में सत्ता गंवाने के बाद विपक्षी दल के सांसद के रूप में उनका पहला आगमन है।

 ‘शीलू! चुनाव लड़ोगी? तुम्हारी उम्र क्या है’? वर्ष 2012 में सामूहिक दुराचार का शिकार हुई शीलू के घर (शहबाजपुर) पहुंचे राहुल गांधी ने यही सवाल किया था। साथ ही दिल्ली बुलाया था।

राहुल गांधी के महोबा आगमन पर शीलू के जेहन में यह बात तरोताजा हो गई। बोली-‘राहुल भइया का पूरा सपोर्ट मिला है। मैं उनके साथ हूं। उन्होंने सीबीआई जांच का भरोसा दिलाया था’।

राहुल गांधी से मिलने के लिए शीलू एक दिन पहले शुक्रवार को ही महोबा पहुंच गई। उसे पूर्व कांग्रेस सांसद पीएल पुनिया ने महोबा बुलाया है।

शीलू ने बताया कि शनिवार को वह सुरक्षा व्यवस्था और भीड़भाड़ के चलते शायद राहुल गांधी से न मिल पाए, लेकिन पुनिया जी ने बायोडाटा लेकर दिल्ली आने को कहा है।
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