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Banda News: फायर सिलिंडर के भरोसे चल रहे अस्पताल, मरीजों की जान को खतरा

Tue, 07 Oct 2025 01:26 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
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फोटो-18 जिला महिला अस्पताल के बाहर लगा फायर फाइटिंग सिस्टम का हाइडेंट प्वाइंट। संवाद
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बांदा। जिले के सरकारी से लेकर निजी अस्पतालों में मानक के अनुसार अग्निशमन उपकरण नहीं लगे हैं। केवल फायर सिलिंडर के भरोसे ही अस्पताल संचालित किए जा रहे हैं। अग्निशमन विभाग ने जिला महिला व पुरुष अस्पताल को एनओसी दे दी है, लेकिन आग बुझाने वाला उपकरण सही नहीं है। मेडिकल कॉलेज को तो एनओसी ही नहीं मिली है। इसी तरह केवल तीन निजी अस्पतालों को एनओसी मिली है, जबकि 30 से ज्यादा निजी अस्पताल संचालित किए जा रहे हैं। इससे मरीजों की जान को खतरा बना रहता है।
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जयपुर के सवाई मान सिंह अस्पताल के ट्रामा सेंटर में रविवार की रात आग लगने से आठ मरीजों की जान चली गई। इसके बाद सोमवार को जिले के अस्पतालों की पड़ताल की गई तो काफी डरावनी तस्वीर सामने आई। 300 बेड के मंडलीय चिकित्सालय में लगे फायर फाइटिंग सिस्टम की अंडर ग्राउंड पाइप लाइन खराब मिली। इसमें लीकेज है। इसी तरह से रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज की अंडरग्राउंड पाइप लाइन में भी लीकेज हैं। इस वजह से इन्हें संचालित नहीं किया जा रहा है।

उधर, जिला अस्पताल व महिला अस्पताल में लगा फायर फाइटिंग हाइड्रेंट, स्प्रिंकलर सिस्टम अब तक हैंडओवर नहीं हो सका है। इसमें भी तकनीकी कमी बताई जा रही है। जबकि दोनों अस्पतालों में लगे इस सिस्टम को अग्निशमन विभाग ने जुलाई माह में ही एनओसी दे दी है। रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में पाइप लाइन लीकेज होने की वजह से एनओसी नहीं दी जा सकी है। तीनों अस्पतालों में अगर आग लगने की घटना होती है तो सिर्फ फायर सिलिंडर ही काम आ सकते हैं।
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जिला अस्पताल का फायर फाइटिंग सिस्टम नहीं हो सका हैंडओवर



जिला अस्पताल में 2.45 करोड़ की लागत से फायर फाइटिंग हाइड्रेंट, स्प्रिंकलर सिस्टम लगाया गया है। कार्यदायी संस्था को इसे 31 दिसंबर तक अस्पताल को हैंडओवर करना था, लेकिन तकनीकी कमी के चलते अब तक हैंडओवर नहीं हो पाया है। यहां 32 हाइड्रेंट प्वाइंट हैं। इनमें प्रेशर की गड़बड़ी है। कहने को तो यह चालू है, लेकिन आग लगने पर काबू कर पाने में सक्षम नहीं है। आग से बचाव के लिए अस्पताल प्रशासन ने सीओटू के 68 व एबीसी के 52 अग्निशमन यंत्र लगा रखे हैं। अग्निशमन विभाग ने जिला अस्पताल में लगे इस सिस्टम को जुलाई माह में एनओसी दी है।

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प्रेशर की दिक्कत से हैंडओवर नहीं हो सका फायर फाइटिंग सिस्टम



जिला महिला अस्पताल में भी डेढ़ करोड़ की लागत से फायर फाइटिंग हाइड्रेंट, स्प्रिंकलर सिस्टम लगाया गया है। इसमें भी प्रेशर की दिक्कत आ रही है। इसके लिए कार्यदायी संस्था को लिखा गया है। अगस्त माह में अग्निशमन विभाग ने इसकी टेस्टिंग कर एनओसी जारी की थी, लेकिन तकनीकी कमी के चलते यह अस्पताल को हैंडओवर नहीं हो सका है।

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मंडलीय चिकित्सालय की अंडरग्राउंड पाइप लाइन में लीकेज



300 बेड के जिला मंडलीय चिकित्सालय में फायर फाइटिंग हाइड्रेंट, स्प्रिंकलर सिस्टम लगाया गया है। अंडरग्राउंड पाइप लाइन में लीकेज होने की वजह से यह चालू नहीं हो सका है। आग से बचने के लिए अग्निशमन यंत्र लगाए गए हैं। वर्तमान में इस अस्पताल में फिजियोथेरेपी, नाक- कान- गला, फिजिशियन, दंत रोग की ओपीडी, पर्चा व दवा काउंटर संचालित हैं।

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मेडिकल कॉलेज की अंडरग्राउंड पाइप लाइन में लीकेज



रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में फायर फाइटिंग सिस्टम लगा है लेकिन इसकी अंडरग्राउंड पाइप लाइन में लीकेज है। इमरजेंसी, वार्ड ब्लॉक, एनआईसीयू, आईसीयू समेत ओपीडी ब्लॉक में अग्निशमन उपकरण लगाए गए हैं। वर्तमान में अग्निशमन उपकरणों के भरोसे अस्पताल की सुरक्षा है। रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में इस तकनीकी कमी के चलते वर्ष 2023 से अग्निशमन विभाग ने एनओसी नहीं दी है। अग्निशमन विभाग ने मेडिकल कॉलेज के लिए 23 करोड़ 24 लाख का इस्टीमेट बनवाया है, जो शासन को भेजा गया है।

30 से ज्यादा निजी अस्पताल, एनओसी सिर्फ तीन को

जिले में 30 से ज्यादा प्राइवेट अस्पताल संचालित किए जा रहे हैं लेकिन अग्निशमन विभाग से एनओसी केवल तीन को ही जारी की गई है। शेष सभी 27 अस्पताल बिना एनओसी के संचालित हैं। इनमें अग्निशमन विभाग के मानक आड़े आ रहे हैं। अग्निशमन विभाग के मानकों में तीन प्रमुख बिंदु फायर सिस्टम, बिल्डिंग की डिजाइन व लाइफ सेविंग सिस्टम को पूरा न कर पाने में अब तक एनओसी नहीं मिल सकी है।



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वर्जन

फायर फाइटिंग हाइड्रेंट, स्प्रिंकलर सिस्टम अब तक हैंडओवर नहीं हो सका है। अग्निशमन यंत्रों को अस्पताल के ओपीडी, वार्ड ब्लॉक, ब्लड बैंक, पैथोलॉजी समेत सभी प्रमुख स्थानों पर लगाया गया है। जल्द ही तकनीकी कमी को दूर कर फायर फाइटिंग सिस्टम हैंडओवर होगा।



- डॉ. के कुमार, सीएमएस, जिला पुरुष अस्पताल, बांदा।

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फायर फाइटिंग हाइड्रेंट, स्प्रिंकलर सिस्टम अब तक हैंडओवर नहीं हो सका है। अस्थायी व्यवस्था के लिए अग्निशमन यंत्रों को अस्पताल के ओपीडी, वार्ड ब्लॉक, पैथोलॉजी समेत सभी प्रमुख स्थानों पर लगाया गया है।



- डॉ. सुनीता सिंह, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल, बांदा।





आग को बुझाने के लिए हौज पाइप व अग्निशमन यंत्र लगे हैं। फायर फाइटिंग सिस्टम लगा है। स्प्रिंकलर नहीं है। इसका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। कार्यदायी संस्था इस पर कार्य करेगी। अभी कार्य शुरू नहीं हो सका है।



- डॉ. सुनील कौशल, रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज, बांदा।

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जिला पुरुष व महिला अस्पताल को एनओसी दी जा चुकी है। मेडिकल कॉलेज की एनओसी का नवीनीकरण नहीं हो सका है। मेडिकल कॉलेज की भूमिगत पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इसका प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। नई पाइप लाइन बिछने पर ही एनओसी दी जाएगी। उधर, जनपद के 30 से ज्यादा प्राइवेट अस्पतालों में से सिर्फ तीन को ही अग्निशमन विभाग ने मानक पूरा करने पर एनओसी दी है।



- कुलदीप कुमार, एफएसओ, बांदा।

फोटो-18 जिला महिला अस्पताल के बाहर लगा फायर फाइटिंग सिस्टम का हाइडेंट प्वाइंट। संवाद

फोटो-18 जिला महिला अस्पताल के बाहर लगा फायर फाइटिंग सिस्टम का हाइडेंट प्वाइंट। संवाद

फोटो-18 जिला महिला अस्पताल के बाहर लगा फायर फाइटिंग सिस्टम का हाइडेंट प्वाइंट। संवाद

फोटो-18 जिला महिला अस्पताल के बाहर लगा फायर फाइटिंग सिस्टम का हाइडेंट प्वाइंट। संवाद

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