बांदा। डेंगू जैसे जानलेवा रोगों समेत मौसमी बीमारियों के मरीजों की भरमार है। आएदिन हो रहीं मौतों के बावजूद जिला अस्पताल में व्यवस्था चाकचौबंद नहीं हो रहीं। दिखावटी सफाई की औपचारिकता निभाई जा रही है। सबसे ज्यादा संकट बिजली का है। भीषण उमस और गर्मी के बीच वार्डों में भर्ती मरीज और उनके तीमारदार बिलबिला रहे हैं। जनरेटर का संचालन अस्पताल कर्मियों के रहमोकरम पर है।जिला अस्पताल के जनरल वार्ड, पुरुष वार्ड और इमरजेंसी वार्ड में सफाई व्यवस्था नाममात्र को हो रही है। बेड की सफाई और उनके चादर बदले बगैर मरीजों को लगातार एक के बाद एक लिटाया जा रहा है।
ऐसे में संक्रामक बीमारियां मरीजों को और गिरफ्त में ले रही हैं। किसी अधिकारी या जन प्रतिनिधि के निरीक्षण की भनक पाकर कुछ देर के लिए अस्पताल की व्यवस्थाएं आनन-फानन दुरुस्त कर ली जाती हैं। उसके बाद फिर पुराने ढर्रे पर आ जाती हैं। सबसे बुरा हाल बिजली का है। अलग फीडर होने के बावजूद दिन रात में कई-कई बार बिजली गुल होती है। जबरदस्त उमस और गर्मी में मरीज और तीमारदार बिलबिला उठते हैं। ज्यादातर वार्डों में इनवर्टर भी नहीं है। जनरेटर संचालन में अस्पताल कर्मियों की मनमानी हावी है। मरीज भले ही पसीने में तरबतर हो जाएं, पर जनरेटर तभी चलता है जब संबंधित कर्मचारी चाहते हैं। खासकर रात को यह संकट और गहरा जाता है।
तीमारदार ऊषा देवी (बदौसा), शिव कुमार (तिंदवारा), मोहम्मद अशरफ (नरैनी), दीपक सिंह (जसपुरा) ने बताया कि किसी भी परेशानी की शिकायत बताने पर ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्से गलत तरीके से पेश आती हैं। मरीज को तकलीफ बढ़ने पर या किसी और कार्यवश उन्हें बुलाने पर उनका व्यवहार बहुत ही अभद्रतापूर्ण होता है। रात को डाक्टर भी नहीं आते। उधर, सीएमएस किशोरीलाल का कहना है कि अस्पताल की व्यवस्थाओं में काफी सुधार हो चुका है। बिजली जाने पर तत्काल जनरेटर चलता है। सफाई भी नियमित हो रही है। जहां भी लापरवाही की बात सामने आती है दोषियों पर कार्रवाई होती है।