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हिट एंड रन : है कोई नेक इंसान, जिसने पाया हो इनाम

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बांदा। सरकार ने हिट एंड रन का कानून तो बना दिया, लेकिन इससे पहले घायलों को अस्पताल तक पहुंचाने वाली गुड सेमेरिटन यानि नेक इंसान योजना का पुरसाहाल भी नहीं लिया। परिवहन विभाग के अधिकारी भले ही लाख दावे कर रहे हो कि उन्होंने अब तक दर्जनों लोगों को नेक इंसान के तहत प्रोत्साहन राशि दी है, पर स्कूल कॉलेजों में यातायात के लिए भाषण देने और सड़कों पर हेलमेट वितरित करने वाले अधिकारी एक भी आदमी को सामने लाना तो दूर, उसका नाम तक नहीं बता सके, जिसे कभी प्रोत्साहन राशि दी गई हो।
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बता दें कि नेक इंसान के तहत सड़क हादसों में घायलों को एक घंटे के भीतर नजदीकी अस्पताल पहुंचाने वालों को पुरस्कृत किया जाना था। वैसे तो प्रतिदिन जिला अस्पताल व अन्य अस्पतालों में आठ से 10 मरीज सड़क हादसे में घायल होकर जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज पहुंचते हैं। योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार न होने और पुलिस की झंझावतों से बचने के चक्कर में लोगों ने समय पर घायलों की मदद करने के बजाय सिर्फ फोन पर सूचना देना ही मुनासिब समझ लिया है। फिर घायल को समय पर मदद मिले या उसकी जान चली जाए, कोई देखने वाला नहीं होता है।
पुलिस के ये सवाल कर देते हैं परेशान
घायलों के मददगार कुछ लोगों ने बताया कि एकाध बार उन्होंने नेक काम की सोची और घायलों को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन इसके बाद दरोगा ने ऐसे-ऐसे सवाल किए कि तुम्हें यह कहां मिले, तुम कहां और किसके साथ जा रहे थे, इसके घरवालों को सूचना क्यो नहीं दी, हादसा कितने बजे हुआ, तुम मौके पर कब पहुंचे, कुछ दिन तक शहर के बाहर नहीं जाओगे, घायल के पास का सामान कहां है आदि, इसके बाद फिर कभी मदद की नहीं सोची।
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खाते में आती है इनाम की राशि
घायल व्यक्ति को गोल्डन ऑवर में अस्पताल पहुंचाने के बाद पुलिस को सूचना देनी होगी। डीएम की अध्यक्षता में गठित मूल्यांकन समिति पुरस्कार का निर्णय करेगी। समिति में पुलिस अधीक्षक, सीएमओ व एआरटीओ (प्रवर्तन) सदस्य होंगे। समिति चयनित व्यक्तियों के नाम परिवहन आयुक्त लखनऊ को भेजेगी। वहां से पुरस्कार राशि गुड सेमेरिटन के खाते में सीधे ऑनलाइन भेज दी जाएगी।
कागजों में तीन नाम, हवा में इनाम
जिला अस्पताल में नेक इंसान के नाम पर खानापूरी की जा रही है। पिछले जून माह में जिला अस्पताल की ओर से तीन नाम भेजे गए। इनमें से किसी को भी नेक इंसान का पैसा मिला कि नहीं, कोई बताने वाला नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सूची में शामिल आंबेडकर नगर के दुर्विजय सिंह भारतीय, कुमेढ़ा सानी के जितेंद्र सिंह व शंकर नगर के रामकृष्ण पाठक के नाम क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी को भेजे गए थे।

बोले जिम्मेदार


जिला अस्पताल प्रशासन की ओर से पिछले जून माह में तीन लोगों के नाम क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी को भेजे गए थे, चूंकि पुरस्कार राशि ऑनलाइन संबंधित के खाते में आती है, इसलिए उन्हें जानकारी नहीं है कि राशि मिली कि नहीं। -डॉ. विनीत सचान, प्रभारी सीएमएस, जिला अस्पताल बांदा।


नेक इंसान का लाभ दर्जनों लोग पा चुके हैं। कौन है और कितनी संख्या सही है, बताना थोड़ा कठिन होगा। हालांकि तय एक घंटे (गोल्डन ऑवर) में अस्पताल पहुंचाने के समय को लेकर पेंच फंसता है। सीएमओ द्वारा भेजे जाने वाली सूची के आधार पर नेक इंसान तय किए जाते हैं।
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शंकर जी सिंह, एआरटीओ, प्रवर्तन, बांदा।
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