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हिंदी के शिक्षकों को इंगलिश मीडियम स्कूलों की कमान

Wed, 23 Jan 2019 11:36 PM IST
ASIF ASIF अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
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गुरेह गांव में इंगलिश मीडियम स्कूल में बच्चों को पढ़ातीं टीचर। - फोटो : अमर उजाला
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परिषदीय स्कूलों को इंगलिश मीडियम में परिवर्तित कर कान्वेंट स्कूल की तर्ज पर चलाने की सरकारी मंशा फिलहाल परवान नहीं चढ़ पा रही। पहला रोड़ा गुरुजनों की कमी का है। दूसरा उनमें अंग्रेजी के ज्ञान की कमी। फिलहाल स्थिति यह है कि जिले में इंगलिश मीडियम के रूप में परिवर्तित किए गए 42 प्राइमरी स्कूलों में 20 शिक्षक हिंदी विषय के तैनात किए गए हैं। मानक के मुताबिक अंग्रेजी विषय में ग्रेजुएशन और दक्षता के शिक्षकों का टोटा है। इन स्कूलों का रखरखाव और व्यवस्थाएं भी पुराने ढर्रे पर हैं। 

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प्रदेश सरकार ने पिछले वर्ष अप्रैल से शुरू हुए नए शिक्षा सत्र में कुछ चुनिंदा प्राइमरी स्कूलों को इंगलिश मीडियम के रूप में संचालित करने आदेश दिए थे। जिला बेसिक शिक्षा विभाग ने जिले के 1280 प्राइमरी स्कूलों में 42 स्कूलों को इंगलिश मीडियम में बदल दिया है। सरकार के आदेशों के पालन की औपचारिकता तो हो गई पर उद्देश्य की पूर्ति होती नजर नहीं आ रही। 10 माह बीतने को हैं और इन स्कूलों के बच्चे अभी अंग्रेजी के ज्ञान में फिसड्डी हैं। यहां तैनात अधिकांश टीचर पुराने ढर्रे पर ही पढ़ा रहे हैं। स्कूलों की कक्षाओं में कहीं से भी कान्वेंट क्लासों के तेवर नजर नहीं आ रहे। 

मानक हर स्कूल में 3-3 शिक्षकों का है। इसके हिसाब से 42 स्कूलों के लिए 126 शिक्षक होने चाहिए, मगर बेसिक शिक्षा विभाग मात्र 85 शिक्षकों को ही चिह्नित कर पाया है। इनमें भी 20 शिक्षक हिंदी विषय के हैं। कई स्कूल इकलौते शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। व्यवस्थाओं का आलम यह है कि किसी भी स्कूल में फर्नीचर नहीं हैं। बच्चों को टाट-पट्टी पर बैठाकर अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों की बराबरी कराई जा रही है। कंप्यूटर, डिजिटल बोर्ड, प्रोजेक्टर की व्यवस्था नहीं है। बिजली नहीं है। 
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इंगलिश मीडियम परिषदीय स्कूलों की स्थिति 
ब्लाक        विद्यालय    शिक्षक        बच्चे 
बड़ोखर        07        24            1070 
बबेरू            05        07            796 
बिसंडा        05        11            700 
जसपुरा        05        08            625 
कमासिन        05        08            770 
महुआ        05        08            608 
नरैनी            05        12            519 
तिंदवारी        05        07            825  
योग           42        85            5913 
 
स्कूलों में 20 शिक्षक पूर्व के तैनात 
अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के लिए प्रधानाध्यापकों को मिलाकर कुल 65 शिक्षकों को चयन किया गया था। इनमें 20 स्कूल ऐसे हैं, जिन्हें इंगलिश मीडियम में परिवर्तित करने के बाद हिंदी विद्यालय के रूप में कार्यरत शिक्षकों को भी इंगलिश स्कूल की भी कमान सौंप दी गई,  जबकि ये अध्यापक अंग्रेजी विषय के दक्ष नहीं हैं। इनमें आठ प्रधानाध्यापक हैं।
 
आवेदन ही नहीं आए तो कैसे करें चयन 
सर्व शिक्षा अभियान के जिला समन्वयक अरविंद अस्थाना का कहना है कि 42 अंग्रेजी माध्यम परिषदीय स्कूलों में तैनाती के लिए कुल 85 आवेदन आए थे। परीक्षा के बाद 65 शिक्षक चयनित किए गए। शिक्षकों की कमी पूरी करने के लिए हिंदी माध्यम के शिक्षकों को लगाया गया है।  

10 माह में ‘वेलकम’ का भी ज्ञान नहीं 
इंगलिश मीडियम स्कूल में बदले गए शहर के नजदीक स्थित गुरेह गांव (बड़ोखर ब्लाक) का विद्यालय अव्यवस्थाओं की बानगी है। यहां बच्चों को इंगलिश मीडियम में शिक्षा लेते 10 माह बीत गए हैं, लेकिन उनके गुरुजन ‘वेलकम’ की जानकारी भी नहीं दे पाए हैं। बच्चों को प्रारंभिक टेबिल का भी ज्ञान नहीं है। ये थ्री (तीन) और नाइन (नौ) के बारे में नहीं बता सके। यहां कुल 285 बच्चों का दाखिला है, लेकिन औसतन दो सौ बच्चे ही आते हैं। प्रधानाध्यापिका गौसिया, सहायक अध्यापक ममता सिंह, गीता तिवारी, अरुण कुमार, अंजूलता समेत सात कर्मचारियों का स्टाफ है। प्रधानाध्यापिका का कहना था कि जुलाई से ही विद्यालय का संचालन शुरू हुआ है। हालांकि शिक्षकों ने पूछे गए प्रत्येक प्रश्न का बेहतर उत्तर दिया।

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