अतर्रा। स्थायी-अस्थायी गोआश्रय स्थल सूने पड़े हैं। मवेशी हाईवे और खेतों पर मंडरा रहे हैं। हाईवे पर हादसों का अंदेशा है तो खेत में किसान की फसल नष्ट होने का खतरा। प्रदेश सरकार का अन्ना मवेशियों को संरक्षण और बेहतर खानपान का उद्देश्य पूरा होता नहीं दिख रहा।
सिस्टम की लापरवाही का खामियाजा सभी को भुगतना पड़ रहा है। बांदा-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग के नंदना-नगनेधी गांव के पास रोजाना आधा सैकड़ा से ज्यादा अन्ना मवेशियों का झुंड शाम ढलते ही सड़क पर डेरा जमा लेता है। इससे हादसों का खतरा बढ़ा हुआ है। हाईवे से निकलने वाले वाहनों को रफ्तार धीमी कर सावधानी से निकलना पड़ता है। दो दिन पूर्व नंदना गांव के नजदीक ट्रक ने दो अन्ना मवेशियों को रौंद दिया था।
तेंदुही गांव में अन्ना मवेशियों के झुंड ने आधा दर्जन किसानों के खेतों पर धावा बोलते हुए 70 बीघे में तैयार की जा रही बेड़ सफाचट कर दी थी। नंदना गांव के रामखेलावन, सुधीर प्रजापति, नंदू रैकवार, सभाजीत, मुलायम, कमल साहू, राहुल, चुनकावन आदि ने बताया कि रोज शाम ढलते ही अन्ना मवेशियों का झुंड सड़क पर बैठ जाता है। पूर्व में कई दुर्घटनाएं भी हो चुकीं हैं। गांवों में बनी अस्थायी गोशालाओं में बंद मवेशियों की देखभाल न होने से वह भटकने को मजबूर हैं।
मुसीबत बन गए हैं अन्ना मवेशी
तिंदवारी। क्षेत्र में 48 स्थायी और अस्थायी गोशालाएं हैं। अप्रैल माह में यहां बंद तकरीबन आठ हजार मवेशियों को खोल दिया गया। अब ये मवेशी राहगीरों और किसानों के लिए मुसीबत का सबब बन गए हैं। मवेशी किसानों की बोई हुई मूंग, उर्द, तिल व धान की नर्सरी को बर्बाद कर रहे हैं। क्षेत्र के 56 गांवों से जुड़े दो बांदा-बहराइच स्टेट हाईवे व बांदा-टांडा नेशनल हाईवे में अन्ना मवेशियों का जमावड़ा रहता है।
आए दिन बाइक सवार चुटहिल होते हैं। कभी-कभी तो ये अन्ना मवेशी राहगीरों के लिए हमलावर हो जाते हैं। मरीजों को लेकर जाने वाली एंबुलेंस सड़कों पर अड्डा जमाए अन्ना मवेशियों के झुंड में फंस जाती हैं। उधर, बीडीओ अमित कुमार यादव का कहना है कि जल्द ही अन्ना मवेशियों को गोशालाओं में बंद कराया जाएगा।