जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर सपा-बसपा के बीच छिड़ी जंग में उच्च न्यायालय के आदेश पर बसपाई जिला पंचायत अध्यक्ष बल्देव प्रसाद वर्मा के वित्तीय अधिकार छीने जाने पर रोक लग गई है। कोर्ट के आदेश के बाद अध्यक्ष समर्थक खेमे में जश्न का माहौल है।
बसपा नेता बल्देव प्रसाद वर्मा 6 माह पहले सपा से छीन कर जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज हुए थे। यह महत्वपूर्ण पद सपा के हाथ से जाने के बाद उनके विरोध में ताना-बाना बुना जाने लगा।
विरोधी जिला पंचायत सदस्यों ने तमाम कार्यों और टेंडरों में अनियमितता, अल्पसंख्यकों को आरक्षण के मुताबिक योजनाओं का लाभ न देकर शासनादेश का उल्लंघन व तमाम अनियमितताओं को लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ हाईकोर्ट की शरण ली।
कोर्ट ने प्रदेश सरकार को जांच के आदेश दिए। इसी के साथ दारोमदार प्रशासन के हाथ आ गया। शासन ने डीएम को जांच सौंपी। डीएम ने 9 बिंदुओं की शिकायतों की जांच कर रिपोर्ट शासन को भेज दी।
इसमें जिला पंचायत अध्यक्ष को दोषी बताया गया। डीएम की जांच रिपोर्ट पर प्रदेश के संयुक्त सचिव अश्वनी कुमार श्रीवास्तव ने राज्यपाल के हवाले से 16 जुलाई को जारी आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया जिला पंचायत अध्यक्ष बल्देव प्रसाद वर्मा अपने कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ रहे हैं और अधिकारों का दुरुपयोग किया है।
लिहाजा उनके वित्तीय अधिकारों पर रोक लगाई जाती है। डीएम ने श्री वर्मा को हटाकर आनन-फानन तीन सदस्यीय संचालन समिति गठित कर दी।
इस आदेश के खिलाफ श्री वर्मा ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। इसमें प्रदेश सरकार समेत 9 पक्षकार बनाए गए। न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल व बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने गुरुवार को मामले की सुनवाई करते हुए 16 जुलाई को जारी आदेश पर अदालत के अगले आदेश तक रोक लगा दी। याची की ओर से अधिवक्ता अशोक नाथ त्रिपाठी व भूपेंद्र कुमार ने पैरवी की।