अवैध खनन पर रोक न लगती देख हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। उच्च न्यायालय ने बांदा जनपद के जिलाधिकारी से तथ्यों सहित जवाबी हलफनामा दाखिल करने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट में पेश की गई अवैध खनन की फोटोग्राफ पर भी न्यायाधीश ने जिलाधिकारी से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी।
जनपद में अवैध खनन को लेकर एनजीटी और हाईकोर्ट में दाखिल की गई याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। दोनों न्यायालयों से अवैध खनन और इसमें काम आने वाली मशीनों पर रोक व ओवरलोडिंग पर लगाम लगाने के आदेश दिए जा चुके हैं।
इंदिरा नगर निवासी दुर्गा शंकर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अवैध खनन के खिलाफ रिट (35308) दायर कर रखी है। उच्च न्यायालय मेें जून माह में आदेश जारी करते हुए खनन में मशीनों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। साथ ही मजदूरों से खनन कराने का आदेश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन पर कड़ाई से अमल करने को कहा था। इसी रिट पर सुनवाई करते हुए अब हाईकोर्ट की डबल बेंच के न्यायमूर्ति अरुण टंडन और सुनीता अग्रवाल ने सोमवार (24 अगस्त) को आदेश दिया है कि कोर्ट में दाखिल किया गया जवाबी हलफनामा संतोषजनक नहीं है।
बेंच ने कहा कि रिट में लगाए गए आरोप बहुत गंभीर हैं। जिलाधिकारी (बांदा) खुद संपूर्ण तथ्यों पर जवाबी हलफनामा दाखिल करें। न्यायालय ने कहा कि अवैध खनन संबंधी कुछ फोटोग्राफ न्यायालय में दाखिल किए गए हैं। जिलाधिकारी इसका भी जवाब दाखिल करें।
इस रिट में बालू कारोबारी मनोज तिवारी और प्रकाशचंद्र द्विवेदी ने उच्च न्यायालय में अर्जी देकर खुद को पक्षकार बनाने का अनुरोध किया था। डबल बेंच ने इस अर्जी को मंजूर कर लिया है। कहा है कि अगली पेशी में यह दोनों अपना जवाब दाखिल कर सकेंगे। इस मामले में हाईकोर्ट अगली सुनवाई 2 सितंबर को शाम 3:30 बजे करेगी।