बारिश शुरू होने से पहले रात दिन तेजी से खनन करके रोजाना करोड़ रुपये की कमाई कर रहे बालू कारोबारियों को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच ने तगड़ा झटका दिया है। उच्च न्यायालय ने पूरे बांदा जनपद में खनन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। कोर्ट की दो सदस्यीय बेंच ने सोमवार को इस बाबत आदेश दिया। अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी।
यूं तो अरसे से जिले में वैध या अवैध खनन हो रहा है। अब बारिश का मौसम आ जाने से नदियों में बाढ़ और रास्तों में दलदल हो जाने की आशंका से बालू कारोबारियों ने पिछले करीब एक पखवारे से खनन और तेज करा दिया है।
बांदा सदर, पैलानी, नरैनी, बबेरू आदि तहसीलों में स्थित केन, यमुना और बागै आदि नदियों से रात-दिन खनन हो रहा है। ऐसे में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने महोबा निवासी कमलेश वर्मा द्वारा दायर की गई रिट पर सुनवाई करते हुए सोमवार को जनपद की सभी खदानों में खनन पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं।
यह जानकारी याचिकाकर्ता कमलेश वर्मा के हाईकोर्ट (लखनऊ) के अधिवक्ता अखिलेश कालरा ने दी। उन्होंने बताया कि न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति अनिल कुमार की बेंच ने अपने आदेश में कहा है कि खनन के लिए शासन ने जो अनुमति दी है वह गलत है।
साथ ही हाईकोर्ट के आदेश के विपरीत है। खंड पीठ ने कहा है कि 13 जुलाई को इसकी सुनवाई की जाएगी और खनन संबंधी सारे मुकदमों को एक करके विशेष खंड पीठ गठित करके सुनवाई की जाएगी। अधिवक्ता श्री कालरा ने बताया कि दायर की गई रिट में कहा गया था कि मशीनों से खनन हो रहा है।
ज्यादातर पट्टे गिने-चुने लोगों को ही दिए गए है। मशीनों के इस्तेमाल और अंधाधुंध खनन से पर्यावरण पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। रिट में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय, प्रमुख सचिव खनन उत्तर प्रदेश, निदेशक खनिज उत्तर प्रदेश, आयुक्त चित्रकूटधाम मंडल, जिलाधिकारी बांदा और खनिज अधिकारी बांदा सहित पांच पट्टाधारकों को भी पार्टी बनाया गया है।