बांदा। राख के ढेर में एक बार फिर सब्जी का बाजार
सजने लगा है। शासन, प्रशासन और नेताओं से मदद न मिलने से मायूस सब्जी
विक्रेताओं ने बची-खुची पूंजी से दुकानेें लगानी शुरू कर दी हैं।
घटना
के 48 घंटे बाद भी तीन सौ से अधिक परिवारों की न तो किसी बड़े अफसर ने सुध
ली और न ही सत्तारूढ़ दल या विपक्ष का नेता झांकने आया। स्थानीय प्रशासन
पहले ही मदद देने से यह कहकर पल्ला झाड़ चुका है कि यह अग्निकांड दैवी आपदा
नहीं है।
राख के ढेर और जली-भुनी सब्जियों के अंबार से वीरान नजर आ
रही सब्जी मंडी में मंगलवार को कुछ तब्दीली शुरू हुई। रोज कमाने खाने वाले
ज्यादातर सब्जी विक्रेताओं ने अपने ठीहे साफ कर या फिर राख के ढेर पर ही
बची-खुची पूंजी से सब्जी की दुकानेें सजानी शुरू कर दी।
इक्का-दुक्का
ग्राहक भी आने लगे हैं। नगर पालिका परिषद के सफाई कर्मी राख और जली सब्जी
का मलबा उठा रहे हैं। अग्निकांड के करीब 48 घंटे बीत जाने के बाद भी
प्रशासन के किसी बड़े अफसर या जनप्रतिनिधि अथवा बड़े नेताओं ने अग्नि
पीड़ितों से मिलकर उनसे हमदर्दी जताने की जहमत नहीं उठाई।
कुछ
स्थानीय नेता ही अग्नि पीड़ितों के साथ हमदर्दी जता रहे हैं। उधर, सपा नेता
हसन सिद्दीकी ने अग्नि पीड़ितों की अर्जी के साथ मुख्यमंत्री को भेजे अपने
पत्र मेें आर्थिक मदद देने का अनुरोध किया है।
सब्जी मंडी की आग
से कई गरीबों के पेट की आग बुझ रही है। रोजाना बची-खुची या घटिया सब्जी
बटोरकर घर की हाड़ी चढ़ाने वाले इन गरीबों के काफी मात्रा में अधजली और
भुनी सब्जी हाथ लगी है।
भुने आलुओं का ये स्वाद ले रहे हैं। इनके
घरों में कई दिन के लिए सब्जी का जुगाड़ हो गया है। झील का पुरवा निवासी
सुनैना और खुटला की रामबाई, बंगालीपुरा की शिवप्यारी, अलीगंज की रशीदन आदि
बेसहारा महिलाओं ने बताया कि अधजले आलू, प्याज, टमाटर, लहसुन इत्यादि उनके
घर में कई दिन तक हंडिया गर्म करेंगे।