मंडलायुक्त कल्पना अवस्थी ने चित्रकूटधाम मंडल में हस्त शिल्प को और बढ़ावा दिए जाने की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने मंडल के चारों जनपदों में अलग-अलग हो रहे हस्त शिल्प के कामों को प्रोत्साहित करने की बात कही है। वे बुधवार को हस्त शिल्प पर आधारित मंडल स्तरीय समीक्षा बैठक में शामिल थीं।
बुधवार को मयूर भवन सभागार में आयुक्त ने बुंदेलखंड और खासकर बांदा में पाए जाने वाले शजर पत्थर के विकास पर जोर दिया। बैठक में मौजूद एनआईएफटी, रायबरेली के प्रो.श्रेषा और सए वैंकट ने शजर पत्थर में अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग करके इसके विकास की जानकारियां दीं।
आयुक्त ने कहा कि चित्रकूट के लकड़ी के खिलौने, महोबा का गोरा पत्थर (पायरो फ्लाइट स्टोन), मौदहा (हमीरपुर) की चांदी की मछली और बांदा का शजर पत्थर के कार्य को और व्यापक क्षेत्र में लाने की आवश्यकता है। उन्होंने शजर पत्थर को ज्योग्राफिकल इंडीकेटर में रजिस्टर्ड कराने की जरूरत बताई।
यह भी कहा कि शजर पत्थर तराशने में अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जाए। आयुक्त ने कहा कि बांदा के शजर कारीगरों को रायबरेली एनआईएफटी भेजकर मार्केटिंग व प्रोडक्ट आदि की जानकारी दिलाई जाएगी। अर्थ एवं संख्या उप निदेशक एसएन त्रिपाठी ने हस्त कला के हुनर को भावी पीढ़ियों को सिखाने पर जोर दिया।