बांदा। एनीमिया होने से किशोरियों व महिलाओं के शारीरिक विकास में बाधा आती है। बड़ी संख्या में महिलाएं इस समस्या से जूझ रही हैं। इसमें 15 से 49 वर्ष की महिलाएं व किशोरियां शामिल हैं। नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे(एनएफएचएस)-5 की रिपोर्ट यह बात सामने आई है।
शासन की ओर से बच्चों के लिए राष्ट्रीय बाल एवं किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें स्कूलों में बच्चों की लंबाई, वजन आदि का परीक्षण कर एनीमिया (खून की कमी) से बचाने के लिए आयरन की गोलियां वितरित करती हैं। इसी तरह गर्भवती महिलाओं के लिए संचालित जननी सुरक्षा योजना में प्रसव के बाद 1400 रुपये मुहैया कराया जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत गर्भवतियों को तीन किस्तों में 5000 रुपये मिलते हैं। साथ ही टीकाकरण किया जाता है और आयरन व कैल्शियम की गोलियां दी जाती हैं। इसके बावजूद किशोरियों से लेकर गर्भवती और सामान्य महिलाएं खून की कमी से जूझ रही हैं।
नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे-5 की रिपोर्ट के मुताबिक 52.2 फीसदी किशोरियां, गर्भवती च सामान्य महिलाएं एनीमिक पाई गई हैं। इनकी उम्र 15 से 49 वर्ष है। सीएमओ डॉ. एके श्रीवास्तव का कहना है कि असंतुलित खान-पान और अनियंत्रित माहवारी के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव से किशोरियों और महिलाओं को एनीमिया की समस्या हो जाती है। शरीर का विकास सुचारू रूप से नहीं हो पाता है। महिलाओं के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है। तभी एनीमिक महिलाओं की संख्या में कमी आ सकेगी।
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चार्ट-
नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे रिपोर्ट में अंतर (प्रतिशत में)-
आयु वर्ग एनएफएचएस-4 एनएफएचएस-5
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5 वर्ष 48.5 46.8
किशोरियां 52.2 50.6
गर्भवती महिलाएं 51.6 50.8
सामान्य महिलाएं 54.0 52.2
इनसेट
एनीमिया के लक्षण
- काम करते समय जल्दी थक जाना।
- सीढि़यां चढ़ते समय सांस फूलना।
- दिनभर कमजोरी महसूस होना।
- अधिकतर समय सांस लेने में कमजोरी होती है।
- आंखों के सामने अंधेरा छाना व चक्कर आना।
- सीने और सिर में दर्द होना।
- पैरों के तलवों और हथेलियों का ठंडा होना।
- आंखों का पीलापन, एनीमिया पहचान का तरीका है।
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इनसेट
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एनीमिक मामलों में आ रही कमी
आरसीएच नोडल अधिकारी डॉ. आरएन प्रसाद ने बताया कि जनपद में एनीमिक मामलों में कमी आ रही है। सर्वे-4 की रिपोर्ट के बाद सर्वे-5 में एनीमिक महिलाओं में लगभग दो फीसदी से ज्यादा कमी आई है। स्वास्थ्य विभाग कर्मी आयरन व कैल्शियम की दवा बांटने के साथ महिलाओं को सेहत के प्रति जागरूक भी किया जाता है।