एक बहन से रेप और दूसरी की हत्या जैसे जघन्य अपराध में आरोपी को अदालत ने उम्रकैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। 15 वर्षीय किशोरी के साथ दुराचार और उसकी 12 वर्षीय छोटी बहन की हत्या कर शव कुएं में फेंक दिया था।
मामला 8 जुलाई 2013 का है। कमासिन थाना क्षेत्र के एक गांव की महिला ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसका चचेरा ससुर गयादीन निमंत्रण में जाते समय गांव के देशवा उर्फ देवराज राजपूत को अपने बच्चों की निगरानी का जिम्मा सौंप गया था। शाम को उसे वापस आ जाना था। घर में उसकी 15 और 12 वर्षीया पुत्रियां थीं। तभी देशवा ने देर रात दोनों बहनों के हाथ-पैर बांध दिए और 15 वर्षीय बालिका के मुंह में कपड़ा ठूंसकर उससे दुष्कर्म करने लगा। इसी बीच छोटी बहन ने बंधन खोल लिए और बहन को बचाने के लिए देशवा से भिड़ गई। इस पर देशवा ने चाकू और कुल्हाड़ी से हमलाकर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। साथ ही छोटी बहन की हत्या कर शव कुएं में फेंक दिया। बड़ी बहन को खेत उठा ले गया और वहां फिर दुराचार किया। इसके बाद फरार हो गया।
घटना के दूसरे दिन पुलिस और ग्रामीणों ने देशवा उर्फ देशराज को दबोच लिया। मंगलवार को अपर सत्र न्यायाधीश शाम कुमार ने आरोपी देशवा उर्फ देशराज को उम्रकैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर छह माह की कैद और होगी। सभी धाराओं में अलग-अलग सजाएं की गईं। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। जुर्माने की आधी राशि पीड़िता पक्ष को दी जाएगी। आरोपी देशवा रिपोर्ट दर्ज कराने वाली महिला का रिश्ते में चचेरा ससुर लगता है। दोनों बालिकाएं उसे दादा कहती थीं।
दहेज हत्या के पांच आरोपी बरी
बांदा। दहेज हत्या के पांच आरोपी अदालत से बरी हो गए। हमीरपुर निवासी छोटेलाल ने यहां शहर कोतवाली में 29 फरवरी 2004 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसने अपनी पुत्री सुनैना की शादी दिसंबर 2001 में बांदा शहर के बिजली खेड़ा निवासी राजेंद्र कुमार धुरिया के साथ की थी।
हैसियत के मुताबिक दान दहेज दिया था। फिर भी ससुराल वाले उसे प्रताड़ित कर रहे थे। आरोप लगाया कि 22 वर्षीया पुत्री को 29 फरवरी 2004 को पति राजेंद्र, ससुराल रामकृपाल, सास मुन्नी, ननद आशा व सुमन ने जलाकर मार डाला। पुलिस ने दहेज हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना करके अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। अभियोजन ने आठ गवाह पेश किए। मंगलवार को विशेष न्यायाधीश (एससीएसटी एक्ट) हरीनाथ पांडेय ने साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया। आरोपियों की वकालत फौजदारी अधिवक्ता ब्रजराज सिंह परिहार ने की।