बांदा। ग्राम पंचायतों को अब जिलाधिकारी की मंजूरी के बाद ही धनराशि जारी की जाएगी। ग्राम पंचायतें विकास कार्य कराने के बाद बिल बाउचर आदि डीएम को देंगी। जिलाधिकारी विकास कार्यों के भुगतान का अनुमोदन करेंगे, फिर डीपीआरओ कार्यालय उतनी राशि ग्राम पंचायत को जारी करेगा।
सरकार पहले विभिन्न योजनाओं व विकास कार्यों की धनराशि सीधे ग्राम पंचायतों को जारी करती थी। हाल के सालों में देखा गया कि ग्राम पंचायतें शासन से मिले बजट को खर्च नहीं कर पाईं। इस पर सरकार ने अब ग्राम पंचायतों को दिए जाने वाले बजट की प्रक्रिया में परिवर्तन किया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश सकरार ने जनपद की मॉडल ग्राम पंचातयों को 33 करोड़ की राशि जारी की थी, लेकिन ग्राम पंचायतें शत प्रतिशत राशि खर्च नहीं कर सकी।
मार्च माह में विभाग को बची 17 करोड़ की राशि शासन को वापस करनी पड़ी। कमोवेश यहीं स्थिति अन्य जनपदों की ग्राम पंचायतों की रही। सरकार ने जनपद स्तर पर ग्राम पंचायतों योजनाओं व विकास कार्य के लिए बजट तो दिया है। नई व्यवस्था के अनुसार यह धनराशि अब सीधे ग्राम पंचायतों को नहीं दी जाएगी।
इनसेट-
बाधित होंगे विकास कार्य
ग्राम प्रधान सरकार की नई व्यवस्था से संतुष्ट नहीं है। परसौडा की ग्राम प्रधान अनामिका वर्मा का कहना है कि सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से आवंटित धन का सही उपयोग होगा लेकिन ऐसा नहीं है ग्राम पंचायतों के पास इतना पैसा नहीं है कि वह पहले काम कराएं और भुगतान बाद में हो। इससे योजनाएं और विकास कार्य प्रभावित होंगे।
देर से मिलता है बजट
कुरैली के प्रधान प्रतिनिधि रत्नेश कोरा का कहना है कि गांव के विकास के लिए शासन से मिलने वाला बजट काफी देर से आता है। वित्तीय वर्ष 2024-25 का बजट जुलाई के अंत में मिला था। बजट खर्च करने लिए महज ग्राम पंचायतों को बमुश्किल आठ माह मिलें। ऐसे में शत प्रतिशत खर्च करना मुश्किल काम है।
वर्जन-
ग्राम पंचायतों को योजनाओं व विकास कार्य का अनुमोदन पहले भी कराना पड़ता था। अंतर सिर्फ इतना है कि बजट ग्राम पंचायतों को एडवांस नहीं मिलेगा। काम के बाद डीएम की मंजूरी से धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी।-अजय कुमार पांडेय सीडीओ।