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Banda News: प्राइवेट से भी महंगा पड़ रहा सरकारी इलाज

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फोटो-18 बीएनडीपी-15 - फोटो : BANDA
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बांदा। जिला अस्पताल में मुफ्त इलाज की सोचकर आ रहे मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों से भी महंगा इलाज पड़ रहा है। अधिकतर डॉक्टर मरीजों की जांच कर बाहरी मेडिकल स्टोर से 500 से 800 तक की दवाएं लिख रहे हैं। बुधवार को पड़ताल में पता चला कि जिन मर्ज की दवाएं लिखी हैं, वह सरकारी अस्पताल के दवा काउंटर पर मौजूद हैं। लेकिन कमीशन के फेर में डॉक्टर मरीजों की आर्थिक स्थिति को नजर अंदाज कर नियम विरुद् बाहर से दवाएं लिख रहे हैं।
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जिला अस्पताल में सरकार के नियम, कानून व दिशा निर्देश बेदम हैं। यहां पर चाहें ओपीडी में डॉक्टरों के आने की टाइमिंग हो या फिर वार्डों में राउंड का समय हर तरफ मनमानी सामने आ रही है। कुछ ऐसा ही खेल मरीजों को दवाएं लिखने में किया जा रहा है। बुधवार को ओपीडी में जांच कराकर निकले कई मरीज निजी मेडिकल स्टोर पर जाते दिखे।
जब उनसे रोककर पूछा गया कि यहां दवा क्यों लेने आए हो तो उनका कहना था कि डॉक्टर साहब ने बाहरी दवाओं के जल्द असर करने की बात कही है। ऐसे में अस्पताल के दवा काउंटर से दवाएं न लेकर बाहरी मेडिकल स्टोर से लेने आए हैं। औसतन हर मरीज ने पांच सौ से एक हजार रुपये की दवाएं मेडिकल स्टोर से खरीदने की बात बताई। सब कुछ जानने के बाद भी जिला अस्पताल के अफसर इस खेल से अनजान होने का दिखावा कर रहे हैं।
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कमीशन का खेल बढ़ रहा
अस्पताल के सूत्रों के मुताबिक बाहर से लिखी दवाओं पर चिकित्सकों का कमीशन होता है। कमीशन के खेल में संलिप्त चिकित्सक ज्यादातर बाहर की महंगी दवाएं लिख रहे हैं। पेट दर्द, बुखार, बच्चों की सामान्य समस्या, चर्म रोग आदि के लिए भी एक रोगी को 500 रुपये से 800 रुपये तक खर्च कर बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
सुनिए मरीजों का दर्द सुनिए
- मजदूर लालाभाई निवासी गड़ाव (बिसंडा) पेट दर्द से पीड़ित हैं। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में एक डॉक्टर को दिखाया, उन्होंने बाहर की दवा लिख दी। मेडिकल स्टोर से 715 रुपए की दवाएं खरीदनी पड़ी हैं।
- महोखर निवासी रंजना के चेहरे में दाग धब्बे हैं, आयुष भवन में डॉक्टर को दिखाया, उन्होंने ने बाहर की दवा लिख दी, मेडिकल स्टोर में 885 रुपये की दवा हो रही थी। उनके पास 500/- रुपये ही थे, 455 की दवाएं ली हैं। अब पैसा नहीं है, शेष दवाएं कल लेंगी।
पवई निवासी किसान रामदास ने बताया कि सीने में दर्द रहता है, हृदय रोग विभाग में डॉक्टर को पांच जनवरी से दिखा रहे हैं। पांच हजार रुपये से ज्यादा खर्च कर चुके हैं, आज भी 675 रुपये की दवाएं बाहर मेडिकल स्टोर से खरीद कर लाए हैं।
- गंछा निवासी विनोद तिवारी ने बेटे आर्यांश को ओपीडी में डॉक्टर को दिखाया। बताया कि डॉक्टर ने बाहर मेडिकल स्टोर से दवाएं लिखीं हैं। 418 रुपये की दवाएं ली हैं। पांच दिन बाद फिर बुलाया है।
वर्जन
प्रभारी सीएमएस डॉ. विनीत सचान का कहना है कि मरीजों के कहने पर चिकित्सक बाहर की दवा लिखते हैं, ज्यादातर मरीज जिला अस्पताल की दवाओं से संतुष्ट नहीं होते हैं।

फोटो-18 बीएनडीपी-16- फोटो : BANDA

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