सेवायोजन कार्यालय (इंप्लायमेंट एक्सचेंज) के भरोसे
सरकारी नौकरी की उम्मीद करने वालों को ‘ओवरएज’ की नौबत आ जाएगी लेकिन नौकरी
का बुलावा पत्र नहीं आएगा।
इसकी बानगी एक-दो नहीं ढेरों शिक्षित
बेरोजगार हैं। जो यहां रजिस्ट्रेशन के बाद डेढ़-डेढ़ दशकों से नौकरी की आस
लगाए बैठे हैं। हर तीसरे साल अपना नवीनीकरण कराते हैं।
सेवायोजन
कार्यालय में इन दिनों 1,05,729 शिक्षित बेरोजगार पंजीकृत हैं। इनमें
85,030 पुरुष और 20,697 महिलाएं हैं। पंजीकरण कराने वालों की शैक्षिक
योग्यता हाईस्कूल से लेकर पोस्ट ग्रेजुएट तक है। इन्होंने इस उम्मीद में
रजिस्ट्रेशन कराया था कि सेवायोजन कार्यालय के जरिये सरकारी नौकरी मिल
जाएगी। पर इनकी उम्मीदों को पंख नहीं लग सके।
रमेश कुमार (बबेरू)
की शैक्षिक योग्यता बीएड है। उसने 15 साल पूर्व सेवायोजन कार्यालय में
रजिस्ट्रेशन कराया था। इसी तरह इंटरमीडिएट उत्तीर्ण आशा देवी 15 वर्ष से
रजिस्ट्रेशन कराए हैं। स्नातक (बीए) मुन्नालाल और सुनीता ने 9 वर्ष पूर्व
रजिस्ट्रेशन कराया था।
राकेश कुमार बीकाम को रजिस्ट्रेशन कराए 12
साल बीत गए। ये सब हर तीसरे साल इस उम्मीद से किराया-भाड़ा खर्च कर
सेवायोजन कार्यालय आकर नवीनीकरण कराते हैं कि शायद नौकरी का बुलावा आ जाए,
पर हर बार मायूसी मिल रही है।
दो दशक पूर्व तक सेवायोजन कार्यालय
के बगैर सरकारी विभागों में नियुक्तियां नहीं होती थीं। इन कार्यालयों का
क्रेज था। इसीलिए इन्हें ‘रोजगार कार्यालय’ कहा जाता था। तब हरेक जनपद में
डीएम की अध्यक्षता में चयन समिति होती थी, वही नियुक्ति करती थी। वर्ष 1995
में यह व्यवस्था खत्म कर सीधी भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
नतीजतन
विभागों ने सेवायोजन कार्यालय से सूची मांगना बंद कर दिया। सेवायोजन
कार्यालय कुछ साल से प्राइवेट सेक्टर में अपने यहां पंजीकृत बेरोजगारों को
रोजगार दिलाने की कोशिश कर रहे हैं।