किसान संवाद गोष्ठी संबोधित करते प्रो.अनिल जनविजय।
- फोटो : अमर उजाला
बांदा। जनवादी लेखक संघ के तत्वाधान में आयोजित किसान संवाद गोष्ठी में साहित्यकारों ने किसानों की बदहाली और उनकी समस्याओं पर चिंतन किया। भूमंडलीय करण का दौर किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताया।
डीसीडीएफ परिसर में रविवार को गोष्ठी में साहित्यकार नासिर सिकंदर ने कहा कि किसानों के सामने भूमंडलीकरण की चुनौती का सामना करना सबसे बड़ी समस्या है। हरे प्रकाश उपाध्याय ने कारपोरेट व्यवस्था से हटकर अपने साहित्य और समाज की ओर चिंतन करने की जरूरत बताई। प्रो.अनिल जनविजय ने कहा कि पूंजीवादी देश अपना वर्चस्व बढ़ाकर पूरी दुनिया में बाजारवाद स्थापित करना चाहते हैं। मौजूदा भूमंडलीकरण में सबसे ज्यादा नुकसान किसानों का हुआ। कुछ वर्षों से देश की राजनीति किसानों के खिलाफ होने से इसका सीधा फायदा पूंजीवादी ताकतें उठा रही हैं।
साहित्यकार सुधीर सक्सेना ने अफसोस जताया कि आज बहुराष्ट्रीय कंपनियां किसान की फसल का मूल तय करतीं हैं। लूट-खसोट के दौर में हमेशा किसान छले गए। आलोचक अजित प्रियदर्शी ने भी किसानों की बदहाली और पूंजीपतियों के मालामाल होने का दर्द बयां किया। सोम भारती ने भूमंडलीकरण से संस्कारों में आई कमी बताई। दूसरे सत्र में आयोजित काव्य पाठ में डा.चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ललित, चंद्रिका प्रसाद सक्सेना कीर्ति, जवाहरलाल जलज, ठाकुदास पंक्षी, राम प्रताप शुक्ल, सुरेंद्र सिंह, कामता काका, ममता मिश्रा, नारायणदास, शशिभूषण, गोपाल गोयल, अमर पाल, जयकांत शर्मा, प्रद्युम्न सिंह, दीनदयाल सोनी ने कविताएं पढ़ीं। संचालन उमाशंकर परमार ने किया। कार्यक्रम में लोकोदय और लोक विमर्श पत्रिकाओं का विमोचन भी हुआ।