बांदा। गणपति बप्पा मोरया’ के उद्घोष के साथ शुक्रवार को विघ्न विनाशक गजानन की प्रतिमा मंत्रोच्चारण के बीच घर-घर स्थापित की गईं। हालांकि, कोविड-19 के चलते इस बार सार्वजनिक स्थानों पर पंडाल नहीं सजाए गए। न ही कहीं बड़ी प्रतिमाएं रखी गईं। आयोजक मायूस हैं।
उधर, अलीगंज स्थित गणेश भवन में भी गजानन की स्थापना विधि विधान से की गई। यहां पांच दिनों तक गण्ेश उत्सव मनाया जाएगा। साथ ही कई प्रतियोगिताएं होंगी। गणेश चतुर्थी का मुहूर्त शुक्रवार का पूरे दिन था। सुबह से ही लोगों में गणेश प्रतिमा स्थापना व पूजन-अर्चन को लेकर खासा उत्साह रहा।
प्रशासन के रोक लगाने के कारण सार्वजनिक स्थानों पर तो प्रतिमाएं नहीं रखी गईं, लेकिन उत्साहित छोटे बच्चों ने गली-मोहल्लों और घरों में प्रतिमाएं रखीं। दोपहर को विधि-विधान से स्थापना की। सारा दिन गणपति बप्पा मोरया के उद्घोष गूंजते रहे।
छोटी बाजार, बलखंडी नाका सहित पद्माकर चौराहा के आयोजकों का कहना है कि पिछले कई सालों से वह प्रतिमाएं रख रहे हैं। मूर्तिकारों को एक-एक हजार रुपये और लाइट-साउंड के लिए एडवांस दे रखा था।
सब बेकार गया। गणेश प्रतिमाओं की स्थापना पर रोक से वर्ष खंडित न हो इसलिए रस्म अदायगी के तौर पर छोटी प्रतिमाएं रखकर पूजन अर्चन करेंगे। कमोवेश यहीं स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों की रही। गांवों में इक्का-दुक्का ही गणेश प्रतिमाएं रखी गई हैं। पंडालों में खास सजावट नहीं की गई है।
पंडालों के आसपास लिखा गया कि भीड़ एकत्र न करें। मास्क लगाएं और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। उधर, शिल्पकारों द्वारा तैयार की गई छोटी मूर्तियां तो खूब खरीदी गईं, लेकिन बड़ी प्रतिमाएं ज्यों का त्यों रखी रह गईं। बाजार में छोटी मूर्ति 500 से 2000 रुपये तक बिकी हैं।
मिट्टी की मूर्ति 1500 रुपये में खरीदी गईं। उधर, एसपी ने सभी कोतवाली प्रभारियों सहित थाना प्रभारियों को निर्देश दिए कि सार्वजनिक स्थानों पर गणेश प्रतिमा की स्थापना न होने दें। आयोजकों को शालीनता के साथ समझाएं। यदि कहीं कोई मूर्ति स्थापित हो गई है तो वहां पर पुलिस की ड्यूटी लगाई जाए। ताकि भीड़भाड़ को रोका जा सके।