बांदा। स्वास्थ्य विभाग के जीपीएफ खातों में सामने आई करीब 1.78 करोड़ रुपये की अनियमितता में अब रिकवरी को लेकर तस्वीर साफ होने लगी है।
महोबा में आरोपी कर्मचारियों ने रकम जमा करना शुरू कर दिया है, लेकिन बांदा में अब तक संबंधित कर्मचारी से एक रुपये की भी रिकवरी नहीं हो सकी है। इससे विभागीय कार्रवाई और अधिकारियों की निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं।
महोबा में तैनात स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ सहायक संतोष कुमार वर्मा और चालक अंबिका शर्मा ने एक-एक लाख रुपये जमा किए हैं। दोनों ने शेष धनराशि भी किस्तों में जमा कराने का आश्वासन दिया है। संतोष पर जीपीएफ खातों में हेरफेर कर करीब 85 लाख रुपये की अनियमितता का आरोप है।
वहीं अंबिका के खाते से भी बिना आवेदन के करीब नौ लाख रुपये निकाले जाने की बात जांच में सामने आई थी। दोनों के खाते सीज किए जा चुके हैं और रिकवरी की प्रक्रिया चल रही है।
बांदा में तिंदवारी सीएचसी के ऑप्टोमेट्रिस्ट देवेंद्र कुमार के जीपीएफ खाते में निर्धारित जमा राशि से अधिक का ऋण लिए जाने का मामला सामने आया था। शुरुआती जांच में करीब 35 लाख रुपये की गड़बड़ी सामने आई थी, बाद की पड़ताल में यह रकम 70 लाख रुपये से अधिक बताई गई। बांदा में अन्य खातों को मिलाकर करीब 93 लाख रुपये की अनियमितता सामने आई है।
देवेंद्र कुमार ने रकम जमा करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा था, लेकिन समय बीतने के बाद भी धनराशि जमा नहीं की। इस पर अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. अभय सिंह ने सीएमओ डॉ. विजेंद्र सिंह को पत्र भेजकर जल्द रिकवरी कराने के निर्देश दिए हैं। निर्देशों का पालन नहीं होने पर आवश्यक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
खाते फ्रीज, जांच जारी
मामला प्रयागराज से आई लेखा विभाग की टीम की जांच में सामने आया था। टीम ने जीपीएफ पासबुक, सेवा पुस्तिका, ऋण और भुगतान से जुड़े अभिलेखों का मिलान किया। बांदा में जिलाधिकारी अमित आसेरी ने जांच के लिए कमेटी गठित की थी। आरोपियों के बैंक खाते फ्रीज किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।