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उफान के दिनों में सूखे पड़े बांध

Fri, 11 Sep 2015 12:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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मानसून के दगा दे जाने से बांदा समेत समूचे चित्रकूटधाम मंडल में एक बार फिर सूखे का खतरा मंडराने लगा है। बरसात के इन महीनों में उफान मारकर बाढ़ का तांडव करने वाले बांध सूखे पड़े हैं। बुंदेलखंड के प्रमुख बांध रनगवां में सिर्फ 11 फीसदी पानी है। गंगऊ और बरियारपुर बांधों में भी पानी की कमी से फिलहाल गेट खोले नहीं गए हैं। उधर, केन और उसकी सहायक बागै व रंज नदी समेत पांच नदियां भी सूखी पड़ी हैं।
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सितंबर बाढ़ और बारिश के लिए सितम का महीना माना जाता है। पिछले कई वर्षों में इसी महीने में जबरदस्त बारिश और बांधों के उफनाने से बाढ़ की तबाही मच चुकी है। अबकी हालात उलट हैं। मानसून लगभग रुखसत हो चुका है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बमुश्किल 65 फीसदी पानी बरसा है।

चित्रकूटधाम मंडल के महत्वपूर्ण बांध रनगवां में मात्र 11 फीसदी पानी है। 15 सितंबर को इस बांध का जलस्तर 764 फीट होना चाहिए, जो इस समय 734 फीट है। 30 फीट पानी नदारद है। ऐसे में खरीफ और रबी की फसलों के लिए सिंचाई विभाग को नहरों के जरिए पानी देना मुमकिन नहीं हो पाएगा।
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इसी तरह गंगऊ और बरियारपुर बांधों का हाल है। इन बांधों में भी पानी नहीं है। सिंचाई विभाग ने फिलहाल बांधों के गेट खोले नहीं है। नरैनी प्रतिनिधि के मुताबिक बुंदेलखंड की प्रमुख केन नदी सहित उसकी सहायक पांच नदियां सूखी पड़ी हैं। मध्य प्रदेश से आईं यह नदियां सितंबर के महीनों में उफान पर हुआ करती थीं, पर अबकी इनमें पानी के लाले हैं।

बागै नदी की सहायक नदी रंज, बरार, पथराई, कड़ैली आदि नदियों की जलधारा टूट गई है। सतना (एमपी) की मेयान घाटी से निकली पथराई नदी 15 किलोमीटर लंबी है। इसी नदी में बांदा जनपद के पंचमपुर गांव मेें बांध बनाया गया है।

बरार नदी सतना जिले के बरौंधा घाटी से निकलकर 25 किलोमीटर का सफर तय करके बांदा जिले के तेरा गांव में बागै नदी में मिल गई है। इसी तरह कड़ैली नदी मध्य प्रदेश से 20 किलोमीटर बहकर बदौसा के बागै नदी में मिली है। रंज नदी मध्य प्रदेश से 15 किलोमीटर दूरी तय करके नरैनी के बरछा गांव में बागै नदी में शामिल हो गई है।

इस वर्ष यह सभी नदियां पानी से खाली हैं। इन नदियों से पानी लेकर खेती करने वाले लाखों किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें हैं। नदियों के इन्हीं हालात को गंभीरता से लेते हुए हाल ही मेें नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने नदी और जंगल बचाने को पत्थर खनन पर पूरी तरह रोक लगा दी है। एमपी सरकार ने पट्टे खारिज कर दिए हैं।

घाटियों के पानी से चल रही केन नहर
बांधों के दगा दे जाने के बावजूद मध्य प्रदेश की घाटियों से निकल रहे थोड़े से पानी ने फिलहाल केन मुख्य नहर को चलाए रखा है। घाटियों से बहकर आ रहा पानी बरियारपुर में जमा होने के बाद 1400 क्यूसेक डिस्चार्ज होकर केन नदी में गिर रहा है। बरियारपुर का जलस्तर 607 फीट है।

बरियापुर में केन नहर का फाटक 8 फीट खोल दिया गया है। सिंचाई विभाग का कहना है कि पानी का जुगाड़ बना रहा तो 31 अक्तूबर तक खरीफ की फसल के लिए नहर चलाई जाती रहेगी।
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