‘सवा लाख से एक लड़ाऊं, तब गोविंद सिंह नाम कहाऊं’
नारा देने वाले सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह की जयंती प्रकाशोत्सव के
रूप में मनाई गई। ग्रंथी ने बताया कि गुरु गोविंद ने जुल्म के खिलाफ लड़ाई
लड़ी। धर्म की खातिर अपने पुत्र भी कुर्बान कर दिए।
सोमवार को गुरु
गोविंद सिंह जयंती अवसर पर छावनी स्थित सिंधी गुरुद्वारे में प्रकाशोत्सव
मनाया गया। भगत अमरलाल ने गुरु के चित्र के सामने दीप प्रज्जवलित कर
कार्यक्रम की शुरुआत की।
उन्होंने कहा कि दसवें गुरु गोविंद सिंह
का जन्म पटना साहिब में 22 दिसंबर 1666 को पूस मास की सप्तमी को हुआ था।
उनकी जयंती पूस मास की सप्तमी को ही मनाई जाती है। इस बारे में अकाल तख्त
से आदेश आया है। उनके पिता गुरु तेग बहादुर और माता गूजरी थीं।
चार
पुत्र बाबा अजीत सिंह, बाबा जनझार सिंह, बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह
सिंह थे। भगत ने बताया कि गुरु के दो पुत्रों को जिंदा सरहद की दीवार में
चुनवा दिया गया और दो पुत्र जंग में शहीद हुए। गुरु गोविंद का कहना था
कि-‘सवा लाख से एक लड़ाऊं, तब गोविंद सिंह नाम कहाऊं’। गुरु ने धर्म की
खातिर अपने पुत्रों को भी कुर्बान कर दिया।