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कोरोना से रोजाना चार शहरियों की मौत

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बांदा। कोरोना महामारी काल में जनहानि जमकर हुई। इस दौरान जान गंवाने वालों में शहरी बाशिंदे सबसे ज्यादा रहे। चित्रकूटधाम मंडल के मुख्यालय बांदा शहर में औसतन रोजाना कोरोना से चार लोगों की जान गईं। तेरह महीनों के 396 दिन में 1454 लोगों को मौत ने अपने आगोश में समेटा। कोरोना से मरने वालों में पुरुषों की संख्या सबसे ज्यादा थी। अकेेले इनका प्रतिशत 56 से अधिक था।
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पिछले वर्ष 2020 में मार्च के महीने में चित्रकूटधाम मंडल समेत मुख्यालय बांदा में कोरोना महामारी ने दस्तक दी थी। इसके बाद कोरोना संक्रमण का शिकंजा और दायरा बढ़ता ही चला गया। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, अब तक कोरोना संक्रमितों की पूरे जनपद में संख्या 10,744 पहुंच चुकी है। जिले में कोरोना से 151 मौतें स्वास्थ्य विभाग के अभिलेखों में दर्ज हैं। नगर पालिका परिषद बांदा में कोरोना काल में मई 2020 से जून 2021 तक शहर में हुई मौतों के आंकड़े उपलब्ध हैं।
समाजसेवी/आरटीआई एक्टिविस्ट कुलदीप शुक्ल को जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत ये आंकड़े नगर पालिका परिषद ने दिए हैं। मई 2020 से जून 2021 तक 13 महीनों में बांदा नगर पालिका क्षेत्र में कुल 1454 मौतें हुई हैं। इसमें 894 पुरुष और 560 महिलाएं हैं। यानि कोरोना संक्रमण काल में रोजाना औसतन करीब चार शहरियों ने जान गंवाई। कोरोना का दायरा फिलहाल तो सिमटा हुआ, लेकिन जिस तरह से दोबारा लोग बेफिक्र होकर बाजारों और अन्य स्थानों पर भीड़ के रूप में टहलने से बाज नहीं आ रहे, उससे तीसरी लहर की संभावना जताई जा रही है।
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माह पुरुष मृत्यु स्त्री मृत्यु योग
मई 20 19 19 38
जुलाई 20 87 44 131
अगस्त 20 58 40 98
सितंबर 20 50 34 84
अक्टूबर 20 77 29 106
नवंबर 20 44 26 70
दिसंबर 20 64 43 107
जनवरी 21 78 46 124
फरवरी 21 66 47 113
मार्च 21 53 29 82
अप्रैल 21 59 28 87
मई 21 143 85 228
जून 21 96 90 186
योग 894 560 1454
बीते मई-जून में मौत का तांडव
कोरोना संक्रमण काल के दौरान मौतों का सर्वाधिक तांडव इसी वर्ष बीते जून व मई-2021 में हुआ। इन दो महीनों में बांदा शहर सर्वाधिक 412 मौतें हुईं। मई में 226 मौतों में 141 पुरुष और 85 महिलाओं की जान गईं। जून में कुल 186 मौतों में 96 पुरुष और 90 महिलाएं शामिल रहीं। इसके अलावा भी कोरोना से मौतें होती रही, लेकिन जून और मई माह में मौतों का ग्राफ एकाएक बढ़ गया था।
कोरोना से मृत्युदर 1.41 प्रतिशत
कोरोना काल के बीते 15 महीनों में बांदा जनपद में कुल 10,744 लोग संक्रमित हुए। इनमें 10,584 इलाज के बाद स्वस्थ हो गए। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पूरी अवधि में अब तक मात्र 151 मौतें हुईं हैं। मृत्युदर मात्र 1.41 प्रतिशत है। रिकवरी रेट 98.52 प्रतिशत और संक्रमण (पॉजिटीविटी) रेट सिर्फ 0.2 प्रतिशत रहा।
वास्तविक संख्या आंकड़ों से अलग
आरटीआई एक्टिविस्ट कुलदीप शुक्ल ने कहा कि कोरोना संक्रमित और इससे हुईं मौतों के वास्तविक आंकड़े स्वास्थ्य विभाग के अभिलेखों से कहीं ज्यादा हैं। संक्रमण से मौत के बाद भी कई लोगों को इसमें शामिल नहीं किया गया। काफी संख्या में लोग संक्रमित होकर घरों में ही रहते हुए अपने स्तर से इलाज कराए। कई की मृत्यु भी हुई। यह सब स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में शामिल नहीं है।

कोरोना काल में रोजाना बड़ी तादाद में होती रही मौतों ने आम लोगों को सहमा दिया। मरने वालों में हिंदू-मुस्लिम आदि सभी धर्मों के थे। मुक्तिधाम के पदाधिकारी अमित सेठ भोलू बताते हैं कि एक दिन में 8-10 शवों का दाह संस्कार इलेक्ट्रिक शवदाह गृह में हो रहा था। संख्या बढ़ जाने में कई का दाह संस्कार मुक्तिधाम परिसर में चिता बनाकर किया गया। अत्यधिक लोड पड़ने से इलेक्ट्रिक शवदाह खराब भी हो गया।
रमजान में बड़ी संख्या में हुए इंतकाल
कोरोनाकाल में अबकी रमजान माह में मुस्लिम वर्ग में बड़ी तादाद में मौतें हुईं। एक दिन में कई-कई जनाजे उठे। शहर की सभी कब्रिस्तानों में सुबह से देर रात तक रोजाना दफनाने का काम चलता रहा। जनाजों को गुस्ल (स्नान) कराने वाले स्वयंसेवी फरीद अहमद उर्फ बाबा भारती (कबड्डी कोच) बताते हैं कि उस दौरान उन्होंने शहर में एक ही दिन में 7 से 8 जनाजों को उन्होंने गुस्ल दिया।
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