कमासिन क्षेत्र के बीरा गांव में मंगलवार को डूबे दो सगे भाइयों समेत तीन बच्चों के शव बुधवार को मिल गए। परिजनों द्वारा पोस्टमार्टम कराए बिना तीनों शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
बुधवार को मवेशियों को पानी पिलाने गए बीरा गांव निवासी राजकुमार के दोनों पुत्र गुड्डू (10) व राहुल (8) और उसके भाई राममनोहर का पुत्र रामलखन (8) यमुना नदी में डूब गए थे। तब से उनकी लगातार तलाश की जा रही थी। बुधवार की सुबह घटनास्थल से डेढ़ से तीन किलोमीटर के बीच तीनों के शव खोज निकाले गए।
थानाध्यक्ष हरीशरण यादव ने बताया कि गुरुवार को सुबह किशनपुर (फतेहपुर) घाट की ओर एक शव की सूचना मिली। उसे नाव से इस पार लाया गया। कुछ देर बाद कठार गांव के गुंजन केवट ने एक बच्चे का शव उतराते देखा। दांदौं घाट के कुछ दूर पहले बालू खदान कर्मियों ने भी एक शव मिलने की सूचना दी।
तीनों शवों का पंचनामा किया गया। थानाध्यक्ष ने बताया कि नायब तहसीलदार शेषमणि त्रिपाठी की मौजूदगी में परिजनों ने शवों का पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया। दोनों बच्चे गवां चुके राजकुमार का कहना था कि उसे किसी तरह की सरकारी मदद की जरूरत नहीं है।
तीसरे बच्चे के पिता राममनोहर ने भी पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया। बड़ी संख्या में गांव व आसपास के ग्रामीणों की मौजूदगी में गमगीन माहौल में बच्चों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
वृद्धा ने की थी बचाने की कोशिश
बुधवार को यमुना नदी में डूब रहे बच्चों को बचाने के लिए गांव की वृद्धा ने भरपूर कोशिश की, लेकिन होनी के आगे उसकी नहीं चल पाई। घटना के वक्त गांव की वृद्धा गुजरतिया यमुना घाट पर नहा रही थी।
उसने तीनों बच्चों को डूबते देखा तो अपनी साड़ी का एक छोर बच्चों की तरफ फेंककर पकड़ने की आवाज लगाई। दुर्भाग्यवश बच्चे साड़ी का छोर नहीं पकड़ सके। वृद्धा का कहना है कि किसी भी बच्चे ने साड़ी पकड़ ली होती तो वह मौत के मुंह से उन्हें खींच लाती।