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थाने में भिड़े सपा पूर्व विधायक और नेता

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कमासिन। सोशल मीडिया में पूर्व विधायक के लिए अपमानजनित मैसेज वायरल करने को लेकर सपा के पूर्व विधायक और एक अन्य सपा नेता अपने समर्थकों समेत थाने में ही आमने-सामने आ गए। हंगामा, हाथापाई और एक-दूसरे को जमकर धमकाने और अशोभनीय शब्दों का प्रयोग हुआ। थाना पुलिस ने बमुश्किल दोनों को समझा-बुझाकर शांत किया।
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दोनों पक्षों ने थाने में तहरीर दी है। शुक्रवार को सपा के पूर्व विधायक विशंभर सिंह यादव के बारे में कमासिन निवासी ज्ञान सिंह यादव द्वारा सोशल मीडिया पर कुछ आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। इस पर सपा कार्यकर्ता अखिलेश कुमार ने कमासिन थाने में तहरीर दी। इस पर पुलिस ने आरोपी ज्ञान सिंह को हिरासत में ले लिया। कुछ ही देर बाद सपा नेता और पूर्व सीबीआई अधिकारी अनिल यादव अपने समर्थक ज्ञान सिंह की पैरवी में थाने पहुंच गए। कुछ ही देर बाद पूर्व विधायक भी समर्थकों के साथ आ गए।
दोनों के बीच जमकर झड़प हुई। हाथापाई की नौबत आ गई। उधर, इन दोनों के समर्थक भी हंगामा करते हुए एक-दूसरे को धमकाते और गरियाते रहे। थाने के दरोगा सरफुद्दीन और संजीव सिंह ने अन्य पुलिस कर्मियों के साथ दोनों पक्षों को बमुश्किल शांत किया। यह हंगामा लगभग एक घंटे चला। दोनों ही पक्ष एक-दूसरे को देख लेने की धमकियां देकर चले गए। उधर, सपा नेता अनिल यादव ने थाने में पूर्व विधायक पर जानलेवा हमला और धमकी आदि के आरोप लगाते हुए तहरीर दी है। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
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प्रेक्षक ने लिया चुनाव तैयारियों का जायजा
खप्टिहा कलां। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नामित प्रेक्षक विनोद कुमार गौर ने शुक्रवार को जसपुरा ब्लाक का निरीक्षण कर मतदान व मतगणना तैयारियों का जायजा लिया। कहा कि स्वतंत्र व निष्पक्ष, पारदर्शी चुनावों के लिए सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में मतगणना होगी। सुरक्षा व्यवस्था की भी जानकारी ली। कृषि उप निदेशक रामकुमार माथुर, सहायक चुनाव अधिकारी सुरजीत सिंह, खंड विकास अधिकारी राघवेंद्र तिवारी, एडीओ पंचायत कमलाकांत, जसपुरा थाना प्रभारी सुनील कुमार सिंह आदि मौजूद रहे। (संवाद)
अब गर्भवतियों को भी लगेगी वैक्सीन
बांदा। अब गर्भवती महिलाओं को भी कोविड टीकाकरण अनिवार्य कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग की दलील है कि इससे गर्भवती और उसके गर्भ में पल रहे शिशु की सुरक्षा होगी। सीएमओ डा. एनडी शर्मा ने बताया कि स्वास्थ्य कर्मी, फ्रंटलाइन वर्कर, 18 साल से अधिक आयु वर्ग के बाद अब गर्भवतियों को टीकाकरण की तैयारी है। इनका डाटा जुटाया जा रहा है। जिन गर्भवतियों की उम्र 35 साल से अधिक है, वजन ज्यादा है, डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर की रोगी हैं, उन्हें संक्रमण का खतरा ज्यादा है। अगर गर्भावस्था में कोविड की चपेट में आने के बाद अब स्वस्थ हो चुकी हैं तो ऐसी महिलाएं टीके के लिए थोड़ा इंतजार भी कर सकती, लेकिन प्रसव के बाद तुरंत वैक्सीन लगवा लेनी चाहिए। (संवाद)
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