बांदा। पूर्व सांसद बालकुमार पटेल पर बालू खदान का पट्टा दिलवाने के नाम पर पीडब्ल्यूडी ठेकेदार सहित चार लोगों से 65 लाख रुपये ऐंठने के आरोप में शहर कोतवाली में धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज हुई है। एक पूर्व लेखपाल भी नामजद है।
शहर के डीएम कालोनी निवासी पीडब्ल्यूडी ठेकेदार रमाकांत त्रिपाठी ने दर्ज कराई गई रिपोर्ट में कहा है कि मार्च 2017 में तत्कालीन यहां के लेखपाल भानु प्रताप चतुर्वेदी ने बालू के काम में 10 फीसदी का पार्टनर बनाने की बात कहकर पूर्व सांसद बाल कुमार पटेल से बांदा डाक बंगले में मिलवाया था।
पूर्व सांसद ने रायबरेली स्थित अपना बैंक का खाता नंबर दिया था। इसमें 20 दिसंबर 2017 को आरटीजीएस से 5 लाख रुपये रमाकांत ने भेज दिए। इसके बाद मई में सिंचाई विभाग के डाक बंगले में मुलाकात के बाद ठेकेदार रुद्र प्रकाश ने 10 लाख, सत्येंद्र शुक्ला ने 20 लाख व योगेश पांडेय ने 9 लाख रुपये दे दिए। पूर्व सांसद ने कहा कि उनके पुत्र सुधीर के नाम मानपुर खुर्द (नरैनी) में पट्टा स्वीकृत हो गया है।
इसके अलावा 16 लाख रुपये भी आरटीजीएस से खाते में डलवाए। इसके बाद पूर्व सांसद टालमटोल करते रहे। आरटीआई में पता चला कि पट्टे की कोई फाइल सुधीर आदि को स्वीकृत नहीं हुई है। एफआईआर में कहा है कि पूर्व सांसद वर्ष 2019 में सपा छोड़कर कांग्रेस में चले गए।
लोकसभा का चुनाव भी हारे। रमाकांत और उसके साथियों ने कुल 65 लाख रुपये लेना बताया है। कहा कि अब भानु प्रताप चतुर्वेदी फोन नहीं उठाते। बाल कुमार भी अब फोन नहीं उठा रहे। रमाकांत के मुताबिक उसके घर में अज्ञात लोग धमकी दे गए हैं कि पूर्व सांसद को दिया पैसा भूल जाओ वरना ठीक नहीं होगा। पुलिस ने बालकुमार पटेल व भानु प्रताप चतुर्वेदी के विरुद्ध धारा 419, 420 व 406 आईपीसी की रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
उधर, पूर्व सांसद बालकुमार पटेल का कहना है कि उन्होंने कभी कोई बालू का काम नहीं किया। न ही लाइसेंस लिया। उन पर लगाए गए आरोप झूठे और निराधार हैं। उन्हें बदनाम करने और राजनैतिक छवि खराब करने की कोशिश करने वाले बेनकाब होंगे। पुलिस जांच में सब कुछ साफ हो जाएगा।