भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) अधिकारियों की चूक से एक पालिसी धारक धोखाधड़ी का शिकार हो गया। फर्जी दस्तावेजों से जालसाज ने पालिसी मेच्योरिटी की रकम हथिया ली। जालसाज व्यक्ति की पहचान हो जाने के बावजूद अधिकारी मामले को दबाने में जुटे हैं। अधिकारियों के रवैए से नाराज पालिसी धारक ने उच्चाधिकारियों से शिकायत की है।
तिंदवारा गांव निवासी विष्णु दत्त ने एलआईसी की एक पालिसी ले रखी थी। जून के पहले सप्ताह में उन्होंने बीमा कंपनी के कार्यालय पर पालिसी मेच्योर होने की सूचना देते हुए भुगतान के लिए आवेदन किया। अधिकारियों ने एक सप्ताह में पैसा खाते में पहुंचने की जानकारी दी।
इस बीच जालसाज ने फर्जी दस्तावेज लगाकर दो लाख रुपये अपने खाते में मंगा लिए। एक सप्ताह बाद विष्णु दत्त ने एलआईसी शाखा आकर जानकारी की तो पता चला कि भुगतान तो हो चुका है। यह सुनते ही विष्णु के पैरों तले जमीन खिसक गई।
उन्होंने तत्काल इसकी शिकायत एलआईसी शाखा प्रबंधक से की। शाखा प्रबंधक ने जांच और रुपये वापस दिलाने का आश्वासन दिया। विष्णु दत्त का कहना है कि धोखाधड़ी करने वाले की पहचान होने के बाद भी अब तक न तो पुलिस को सूचना दी गई और न ही कोई कार्रवाई।
उधर, एलआईसी शाखा प्रबंधक आरएस यादव ने बताया कि उपभोक्ता के साथ हुई धोखाधड़ी की जांच की जा रही है। धोखाधड़ी करने वाले व्यक्ति की पहचान भी कर ली गई है। गुरुवार को वह जांच के लिए तिंदवारी गए थे। वहां कुछ लोगों से पूछताछ में पता चला है कि धोखाधड़ी करने वाला व्यक्ति तिंदवारी का निवासी है। जांच पूरी होने के बाद कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।