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Banda News: 30 साल से घंटी बजी न क्लास लगी, फिर भी निकल रहा वेतन

Sun, 29 Mar 2026 01:28 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
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फोटो- 03 पुंगरी गांव में अपनी बदहाली को बयां करता संस्कृत विद्यालय। संवाद
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बांदा। नरैनी तहसील क्षेत्र के पुंगरी गांव में स्थित जर्जर महावीर संस्कृत उच्च माध्यमिक विद्यालय में पिछले 30 सालों से न कभी घंटी बजी और न ही श्लोक गूंजे फिर भी संविदा पर कार्यरत तीन शिक्षक हर माह वेतन पा रहे हैं। सालों से बंद चल रहे विद्यालय की तस्वीर हैं ऐसी है कि कमरों की छतें चिटक गई हैं और परिसर में झाड़-झंखाल ही दिखाई दे रहा हैं। देखने से नहीं लगता कि यहां लंबे समय से कोई आया भी है।
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ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने दशकों से न तो विद्यालय को खुलते देखा है और न ही किसी छात्र को आते-जाते। यह बात और है कि कागजों में यहां 15 छात्र नामांकित दिखाए जा रहे हैं। जिनकी उपस्थिति भी नियमित रूप से दर्ज की जाती है। इस पर भी हैरत की बात यह है कि किसी जिम्मेदार ने भी इस विद्यालय की सुध नहीं ली है। यही वजह है कि संचालन के नाम पर हर माह लाखों का खर्च दिखाया जा रहा है।



- पढ़ाया भले न हो पर वेतन बढ़कर पाया

यहां संविदा पर तीन शिक्षकों की नियुक्ति तीन साल पहले हुई थी। उन्हें शुरुआत में 15 हजार रुपये प्रतिमाह का वेतन दिया जाता था। अप्रैल 2025 में आए एक शासनादेश के बाद इन संविदा शिक्षकों के वेतन में 10 हजार रुपये की वृद्धि की गई जिससे वेतन बढ़कर 25 हजार रुपये प्रतिमाह हो गया। इस तरह बंद चल रहे विद्यालय से भी तीनों शिक्षक प्रतिमाह 75 हजार रुपये का वेतन उठा रहे हैं।
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- गांव में विद्यालय और बच्चे जा रहे दूर



ग्रामीण पप्पू यादव का कहना है कि ने गांव का विद्यालय सालों से बंद है। इस कारण उन्हें अपने बच्चों को पढ़ने के लिए दूर दूसरे गांव में भेजना पड़ता है। यदि यही स्कूल सही से चलता तो बच्चों की परेशानी कम हो सकती थी। पुंगरी निवासी सत्यम मिश्रा का कहना है कि हमने तो इस स्कूल को खुलते कभी देखा ही नहीं। सरकारी धन की लूट हो रही है। ग्रामीण विश्वेश्वर दयाल शर्मा के मुताबिक विद्यालय के नाम पर हो रहे भ्रष्टाचार की जांच होनी चाहिए। कभी इसी विद्यालय के छात्र रहे ग्रामीण सिद्ध शरण अग्निहोत्री का कहना है कि अब यह विद्यालय उपेक्षा का शिकार है।

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पुंगरी गांव स्थित महावीर संस्कृत उच्च माध्यमिक विद्यालय को लेकर शिकायतें संज्ञान में आई हैं। विद्यालय की वास्तविक स्थिति की जांच कराई जाएगी। यदि विद्यालय बंद पाया जाता है या कागजी संचालन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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दिनेश कुमार, जिला विद्यालय निरीक्षक
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